राज्य सरकार ने अभी तक आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया है।
गत वर्ष सरकार ने गन्ने की अगेती प्रजाति का 325, सामान्य प्रजाति का 315 और अनुपयुक्त प्रजाति का 310 रुपये प्रति कुंतल मूल्य घोषित किया था।
हालांकि यह तय माना जा रहा है कि गत वर्ष से दाम कम नहीं होंगे। जिले में 5 शुगर मिलें हैं। शुगर मिलों का पेराई सत्र इस माह के आखिरी या नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगा।
ऐसे में अनेक किसानों को धन की जरूरत है और उन्होंने गन्ना कोल्हू पर डालना शुरू कर दिया है।दाम मात्र 180 से 200रुपये कुंतल के हिसाब से मिल रहे हैं, लेकिन यह भुगतान नकद हो रहा है।
जिले में सैंकड़ो की संख्या में कोल्हूओं का संचालन हो रहा है और काफी लोग कोल्हू चलाने की तैयारी में लगे हैं।
15 दिन पहले तो 250 से 280 रुपये प्रति कुंतल के दाम पर कोल्हू में गन्ना लिया गया। किसानों ने काफी गन्ना डाला। कोल्हू संचालकों की मांग पूरी हो गई तो भाव कम कर दिया।
किसानों का कहना है कि उनकी मजबूरी का फायदा सभी उठाते हैं। शुरू में कोल्हू में ठीक दाम मिल रहा था, लेकिन अब 180 से अधिक भाव नहीं है।
किसानों को पैसों की जरूरत है तो उसी भाव में डालने को मजबूर हैं। मिलों द्वारा गन्ने के भुगतान की स्थिति तो किसी से छिपी नहीं है- पिछले सत्र का भी अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है।
अब शादियों का सीजन भी शुरू होने वाला है। साथ ही किसान के अन्य खर्चे भी हैं। इसलिए औने-पौने दाम में गन्ना बेच रहे हैं। किसी को किसान की फिक्र नहीं है।
किसानों का यह भी कहना है कि स्कूलों की तरफ से बच्चों की फीस भरने का बहुत दबाव है। इसके साथ-साथ बिजली विभाग के लोग भी उनका उत्पीड़न करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
लगातार किसानों पर एफ आई आर दर्ज हो रही हैं और किसान इस समय बहुत परेशान है।