{ वाराणसी से मदन मोहन शर्मा की रिपोर्ट }
.कोरोना वायरस को हराने के लिए लॉक-डाउन जरुरी है। लेकिन इस लॉक-डाउन के कारण शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक आमजनमानस त्रस्त है। उनकी परेशानी का कारण घर से बाहर निकलना नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति है जो दिन पर दिन बिगड़ती नजर आ रही है।

इसका सबसे बड़ा असर देश के किसानो पर भी पड़ रहा है जिनकी कच्ची फसल खासा प्रभावित हो रही है। ऐसे में कुछ सगठनों ने शहर से बाहर निकल इन ग्रामीण इलाकों में पहुंच कर अनोखा प्रयास कर रहे हैं। इस प्रयास से किसानो हल्की ही सही मुस्कान जरूर आई है।

जहाँ लॉक डाउन से शहर से 12 किलोमीटर दूर राजातालाब के किसान प्रभावित हैं।वहीं स्वास्थ्य के चिंता के साथ ही इन्हे अब अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता है।
ये चिंता है उनके कच्चे फसल का जो बाजार में न बिकने के कारण ख़राब हो रही हैं। लॉकडाउन में इन किसानों को शहर ले जाकर इन्हे बेचने का समय अधिक नहीं मिल पा रहा है और ऐसे में इनका फसल बर्बाद हो रहा है।

लॉक डाउन के दरम्यान कुछ सामजसेवी संगठन शहर में निराश्रितों के लिए खाने का व्यवस्था कर रहे हैं। ऐसे में इन्ही समाजसेवी संगठनों ने एक संगठन ने अनोखा प्रयास किया है।
इस संगठन को जब इसकी जानकारी मिली तो निराश्रितों को बाटने कच्चे सब्जियों को इन किसानों से खरीदना शुरू किया। जिससे इनके द्वारा उगाये गए कच्ची सब्जियां जैसे बैगन,कोहड़ा ,मिर्ची और अन्य सामग्रियां इन किसानो के घर तक पहुंच कर वो इनसे उचित दामों में खरीद कर शहर आकर जरूरतमंदों को वितरित कर रहे हैं।
इस संगठन के इस अनोखे प्रयास से सूने पड़े इनके खतों में फिर से हल्की भीड़ दिखनी शुरू हुई और इन्हे इस बंदी में आर्थिक रूप से मदद भी मिलनी शुरू हो गयी हैं ,जिसके कारण इन किसानों को थोड़ा ही सही लेकिन राहत मिला है।