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Uttrakhand News: उत्तरकाशी में बनेगी भारत-चीन सीमा क्षेत्र की सड़क, सेना को होगा लाभ

उत्तरकाशी में भारत माला परियोजना में सड़क पुनर्वास के लिए एक हजार करोड़ की डीपीआर तैयार की गई। इस दौरान भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की भैरोंघाटी से पीडीए तक की सड़क बनाने की परियोजना बनाई जा रही है।

By: Priya Tomar 
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Uttrakhand News: उत्तरकाशी में बनेगी भारत-चीन सीमा क्षेत्र की सड़क, सेना को होगा लाभ

Uttrakhand News: उत्तरकाशी में भारत माला परियोजना में सड़क पुनर्वास के लिए एक हजार करोड़ की डीपीआर तैयार की गई। इस दौरान भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की भैरोंघाटी से पीडीए तक की सड़क बनाने की परियोजना बनाई जा रही है।

सेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस सड़क की निर्माण किया जाएगा। इसके लिए बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) ने भारत माला परियोजना में सीमा क्षेत्र सड़क पुनर्वास के लिए लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत की डीपीआर तैयार की है।

बैली ब्रिज को पक्के पुल में बदला जाएगा

इस परियजना के तहत सीमा क्षेत्र के अवशेष बैली ब्रिज को पक्के डबल लेन पुलों में बदलने की तैयारी के साथ- साथ पहली बार लंबे समय से सक्रिय भूस्खलन जोन का भी ट्रीटमेंट इसके साथ ही शुरू किया जाएगा।

दरअसल, उत्तराखंड राज्य में उत्तरकाशी सहित चमोली और पिथौरागढ़ जिलों की सीमा चीन से लगती है। पिछले कुछ वर्षों से केंद्र सरकार यहां सड़क पर सुधार कार्यों को करने के लिए जुटी हुई है।

क्या है भारत माता परियोजना

इस परियोजना की शुरुआत केंद्र सरकार के सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 2015 में शुरू की थी, जो सीमा क्षेत्र सहित तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़कों के विकास, राष्ट्रीय गलियारों, आर्थिक गलियारों व अन्य की दक्षता में सुधार इत्यादि पर ध्यान केंद्रित करती है।इस परियोजना का पहले चरण में लक्ष्य 5.35 लाख करोड़ रुपये की लागत था जिससे 34,800 किलोमीटर तक का राजमार्ग बनाना है।

सीमा क्षेत्र में बनाई जाएंगी पक्की सड़क

पुल के साथ अब सीमा क्षेत्र में अग्रिम चौकियों तक भी पक्की और अच्छी सड़क बनाई जा रही है। इस निर्माण परियोजना में अब सेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़कों का सुधार किया जा रहा है।

इस योजना के तहत भैरोंघाटी से पीडीए तक करीब 60 किलोमीटर के दायरे में सड़को को तैयार किया जा रहा है। इस सीमा क्षेत्र की सड़क को सेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है।

इस क्षेत्र में छह बैली ब्रिज आते हैं, जो पक्के और डबल लेन जल्द ही पुलों में बदले जाएंगे।

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