धारः पारणोत्सव जीवन में तप के महत्व को उजागर करता है और उपवास के माध्यम से हमें संस्कारों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। ऐसे अवसर पर हम सभी को पूर्णता की प्राप्ति के लिए अपने गुरुजनों का आशीर्वाद अवश्य ग्रहण करना चाहिए, एताकि उनके मार्गदर्शन से हम स्वयं को भी धन्य बना सकें।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैसे तो मानव शरीर सबका समान है लेकिन इस शरीर के अंदर से संस्कार उत्पन्न करने के लिए उपवास और साधना के मार्ग के माध्यम से किया जाता है। वैसे तो हमारे लिए 365 दिन की मंगल तिथि होती है लेकिन अक्षय तृतीय का प्रत्येक क्षण अक्षय होता है। ऐसे में अक्षय तृतीय के दिन यह मानव उत्सव के माध्यम से अपने साधन से अपने इस जन्म और आने वाले जन्म को भी पुण्य करने के लिए यह जो हमारा पुण्यप्रस्थ मार्ग है साधना का मार्ग। हमारे लिए प्रथम तीर्थांकर भगवान आदिनाथ जी के माध्यम से यह जो धारा बही है सच में यह गंगोत्री की धारा है जिसमें डुबकी लगाओं और जीवन धन्य हो जाता है। हमारा अपना जीवन उस मार्ग पर चलने के लिए हमको शक्ति भी देता है।

सरकार केवल निर्माण में लग जाय और संस्कार भूल जाय तो बात नहीं बनती। भारत की सनातन संस्कृति में इस बात का अहसास आज दुनिया के सामने हो रहा है। धन, ताकत, वैभव जितना भी हो जाय लेकिन जो पाने में आनंद है वो थोड़ा छोटा है वहीं जो देने में आनंद है उस आनंद की बात कुछ और हो सकती है। और वो संस्कृति हमको दुनिया में कहां से कहां पहुंचा देती है। हमारी सनातन संस्कृति सदैव से देने की भावना पर आधारित रही है और हमने पूरे विश्व में ज्ञान एवं मूल्यों का प्रसार किया है।