विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित पर्यावरण पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति और सतत विकास के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की सनातन संस्कृति में निहित पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा को समझ रहा है। भारतीय परंपरा में प्रकृति को पूजनीय माना गया है और पेड़-पौधों में भी जीवन होने की मान्यता सदियों से रही है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान महत्व दिया गया है।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी, वन संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श राज्य बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।