उत्तराखंड में आगामी पंचायत चुनावों पर हाई कोर्ट ने बड़ी रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण चुनावी प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने सरकार से मामले में जवाब मांगा है और कहा है कि जब तक आरक्षण को लेकर विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक चुनाव कराना उचित नहीं होगा। इस फैसले के बाद प्रदेश के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया रोक दी गई है।राज्य में सोमवार से पंचायत चुनाव के नामांकन पत्रों की बिक्री शुरू हो गई थी, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के कारण अब यह प्रक्रिया रुक गई है। न्यायालय ने कहा कि आरक्षण के नए नियमों पर विवाद है और इस विवाद का समाधान किए बिना चुनाव कराना गलत होगा। हाई कोर्ट की खंडपीठ में चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र और जस्टिस आलोक मेहरा ने चुनाव में रिजर्वेशन रोटेशन प्रक्रिया को नियमानुसार नहीं पाया और इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब मामले पर पहले से सुनवाई चल रही थी तो चुनाव कार्यक्रम क्यों जारी किया गया।
याचिका और आरक्षण विवाद
यह रोक एक याचिका के बाद लगी है, जो बागेश्वर निवासी गणेश दत्त कांडपाल और अन्य ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने 9 जून 2025 को एक नया आदेश जारी कर पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण नियमावली में बदलाव किया, जिससे पिछले तीन कार्यकाल से आरक्षित सीटों को चौथी बार भी आरक्षित कर दिया गया। इससे याचिकाकर्ता सहित कई उम्मीदवार चुनाव में भाग नहीं ले पा रहे हैं। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में पहले से ही दिशा निर्देश जारी हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया।
सरकार ने कोर्ट से जवाब देने के लिए 24 जून तक का समय मांगा था, लेकिन उससे पहले ही पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी गई। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब मामला विचाराधीन है तो चुनाव की घोषणा कैसे की गई। इसी को देखते हुए हाई कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी और सरकार को निर्देश दिए कि वह मामले में अपना पक्ष प्रस्तुत करे।
चुनाव कार्यक्रम पर हुआ असर
सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के मुताबिक, 25 से 28 जून तक नामांकन जमा करने थे, जबकि नामांकन पत्रों की बिक्री 19 जून से शुरू हो गई थी। इसके बाद 29 जून से 1 जुलाई तक नामांकन पत्रों की जांच की जानी थी, और 2 जुलाई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते थे। पहले चरण का मतदान 10 जुलाई को और दूसरे चरण का मतदान 15 जुलाई को होना था। मतगणना 19 जुलाई को निर्धारित थी। अब हाई कोर्ट के आदेश के कारण यह पूरा चुनाव कार्यक्रम फिलहाल टल गया है और आगे की प्रक्रिया कोर्ट के जवाब मिलने के बाद ही शुरू होगी।