कोविड-19 के कारण लॉक डाउन के दौरान महानगरों से अपने गांव वापस आए प्रवासी मजदूरों का महानगरों के लिए लौटने से पहले प्रधानमंत्री जन आरोग्य कार्ड बनेगा,ताकि वे कहीं भी रहें, पूरे परिवार को भविष्य में गंभीर तथा महंगे इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।
जिलाधिकारी के आदेश पर चिन्हित किए गए तीन सौ प्रवासी मजदूरों में से अब तक 135 के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। नौ सितंबर तक जिले में आयुष्मान भारत योजना के कुल 1.41 लाख लाभार्थी परिवार हो चुके हैं। इसमें से 1.15 लाख परिवार प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के हैं और 26 हजार 468 मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के हैं।
जिलाधिकारी राजेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रवासी मजदूरों को चिन्हित कर गांव से वापस जाने के पहले प्रधानमंत्री जन आरोग्य कार्ड जारी किया जाए। सीएमओ डा. एके मिश्रा ने बताया कि पूरे देश में योजना से संबद्घ अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए प्रतिदिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रवासी मजदूरों को जल्द से जल्द नजदीक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर पहुंचकर गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।






