सिंहस्थ महाकुंभ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन को एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। शहर के नवलखी आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है।
उज्जैन वन मंडल के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित फॉरेस्ट जू में 300 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप रखा जाएगा। पर्यटकों को यहां पारंपरिक चिड़ियाघर के बजाय जंगल जैसा वास्तविक अनुभव मिलेगा। परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जबकि प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा गया है।
फॉरेस्ट जू का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित होगा, जहां भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास के अनुरूप रखा जाएगा। इस क्षेत्र में ड्राइव-थ्रू सफारी, खुले बाड़े और आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
दूसरे चरण में ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ थीम पर विकास किया जाएगा। इसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के वन्यजीवों को भी शामिल किया जाएगा। इससे उज्जैन का यह फॉरेस्ट जू राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान बना सकेगा।

परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और अंडरपास शामिल हैं, जो सड़क से विभाजित दोनों वन क्षेत्रों को जोड़ेंगे। इस ओवरब्रिज पर बैटरी संचालित इलेक्ट्रिक सफारी की सुविधा होगी, जबकि पैदल पर्यटकों के लिए अलग मार्ग बनाया जाएगा। साथ ही व्यापक वृक्षारोपण कर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की योजना है।
वन विभाग का मानना है कि सिंहस्थ-2028 से पहले परियोजना के पहले चरण का कार्य शुरू होने से उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के साथ ईको-टूरिज्म को भी नई दिशा मिलेगी। इससे शहर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।