1. हिन्दी समाचार
  2. Ujjain
  3. उज्जैन में संस्कृत शिक्षा का महाकुंभ, स्वामी गोविंद देव गिरि को ‘महामहोपाध्याय’ की मानद उपाधि से सम्मानित

उज्जैन में संस्कृत शिक्षा का महाकुंभ, स्वामी गोविंद देव गिरि को ‘महामहोपाध्याय’ की मानद उपाधि से सम्मानित

उज्जैन में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में स्वामी गोविंद देव गिरि को ‘महामहोपाध्याय’ की मानद उपाधि दी गई। समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया और संस्कृत शिक्षा पर जोर दिया गया।

By: Nivedita 
Updated:
उज्जैन में संस्कृत शिक्षा का महाकुंभ, स्वामी गोविंद देव गिरि को ‘महामहोपाध्याय’ की मानद उपाधि से सम्मानित

धर्मनगरी उज्जैन में एक बार फिर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत शिक्षा का भव्य संगम देखने को मिला। महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में देशभर के संतों, शिक्षाविदों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में शिक्षा और संस्कृति का उत्सव मनाया गया।

स्वामी गोविंद देव गिरि को मिली मानद ‘महामहोपाध्याय’ उपाधि

समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को ‘महामहोपाध्याय’ की मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान किया जाना रहा। इस सम्मान को संस्कृत शिक्षा और वैदिक परंपरा के क्षेत्र में उनके योगदान की महत्वपूर्ण मान्यता माना जा रहा है।

राज्यपाल ने की दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता

कालिदास संस्कृत अकादमी के पंडित सूर्यनारायण व्यास सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगूभाई पटेल ने की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, तथा अन्य कई प्रतिष्ठित विद्वान एवं संत उपस्थित रहे।

 

मेधावी विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में पीएचडी, स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इस वर्ष कुल 1303 पात्र विद्यार्थियों में से 179 विद्यार्थियों ने समारोह में भाग लिया।

संस्कृत शिक्षा और आधुनिकता के समन्वय पर जोर

कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा के संरक्षण और आधुनिक शिक्षा के साथ उसके समन्वय पर विशेष बल दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्कृत शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

 

रिपोर्ट – प्रियंक

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...