मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इन दिनों खेतों में फसल से ज्यादा राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुकरू क्षेत्र में खेत में उतरकर हल चलाया और बोवनी कर किसानों के बीच उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी बैतूल पहुंचे और किसान के खेत में हल थामते नजर आए।
लगातार हो रही इन गतिविधियों ने जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। एक ओर सत्ता पक्ष किसानों के बीच जाकर कृषि कार्यों में सहभागिता दिखा रहा है, तो वहीं विपक्ष भी खेतों में उतरकर किसानों से जुड़ाव का संदेश दे रहा है। हालांकि इन तस्वीरों के बीच वास्तविक किसान समस्याओं को लेकर बहस भी तेज हो गई है।
जिले के किसानों का कहना है कि वे आज भी खाद, बीज, सिंचाई व्यवस्था, मौसम की अनिश्चितता, बढ़ते कर्ज और फसलों के उचित दाम जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका मानना है कि खेतों में कुछ समय के लिए हल चलाने या फोटो खिंचवाने से उनकी वास्तविक परेशानियां कम नहीं होतीं।

किसानों ने सवाल उठाया है कि क्या कुछ मिनटों की राजनीतिक उपस्थिति से उनकी स्थिति में सुधार संभव है? वे चाहते हैं कि नेता केवल प्रतीकात्मक गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
बैतूल के खेतों में इस समय हालात ऐसे हैं कि वहां फसल की बुआई से ज्यादा राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा हो रही है। किसानों का कहना है कि वे नेताओं के दौरे से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक राहत और नीतिगत समाधान की अधिक आवश्यकता है।