मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विकास के मुद्दे पर सभी एकजुट हैं और साझा प्रयासों से मध्यप्रदेश को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी-सभी के कल्याण के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। इसी क्रम में ‘GYAN’ में I for Industrialisation और I for Infrastructure को जोड़कर इसे GYANII बनाया गया है, जो अब प्रदेश विकास का मूल मंत्र बनेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसानों की सबसे बड़ी जरूरत बेहतर कनेक्टिविटी है, ताकि वे अपने उत्पाद देश की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकें। इसी उद्देश्य से उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाई-वे परियोजना को मंजूरी दी गई है। करीब 5,017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाई-वे क्षेत्र के समग्र विकास की नई पहचान बनेगा। यह परियोजना नॉन-एलीवेटेड (जमीन स्तर) पैटर्न पर विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर उज्जैन जिले के घट्टिया और नागदा विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए किसानों और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना को त्वरित मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। घट्टिया विधायक डॉ. सतीश मालवीय और नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को ‘विकास पुरुष’ बताते हुए गजमाला से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कम समय में प्रदेश में उल्लेखनीय विकास हुआ है और इसका लाभ सीधे आम नागरिकों को मिल रहा है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी एरिया में उज्जैन, नागदा, खाचरौद और रतलाम के शामिल होने से पूरे क्षेत्र का समग्र विकास होगा। साथ ही, आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में गंभीर नदी पर बने बांध को जोड़ते हुए एक नए सड़क मार्ग को भी मंजूरी दी गई है, जिससे उज्जैन और रतलाम के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसान हितैषी निर्णय ले रही है। सरकार ग्रीष्मकालीन उड़द उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हर किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। इसके साथ ही सरसों को भावांतर भुगतान योजना में शामिल किया जाएगा। चना, मसूर, तुअर सहित अन्य दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश का दुग्ध उत्पादन देश के कुल दूध उत्पादन का करीब 9 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बच्चों के पोषण के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता और फिर उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। अगले तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के एक लाख किसानों को सोलर पावर पंप दिए जाएंगे। इससे सिंचाई की समस्या दूर होगी और अतिरिक्त बिजली बेचकर किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट और फूड पार्क विकसित किए जाएंगे, ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य स्थानीय स्तर पर ही मिल सके। इस अवसर पर समाजसेवी राजेश धाकड़ सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान मौजूद रहे।