मध्यप्रदेश सरकार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के पहले दो वर्षों में राज्य में कृषि, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और डिजिटल शासन सहित अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व पहलें और उपलब्धियाँ दर्ज की गई हैं। इन पहलों में योजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश आकर्षण, नई परियोजनाओं तथा सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर विशेष जोर रहा है। नीचे प्रमुख क्षेत्रों के उपलब्धि-परिदृश्य संक्षेप में प्रस्तुत हैं।




उपज में वृद्धि: राज्य में वर्ष 2025 में कृषि योग्य रकबा 25.96 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.39 लाख हेक्टेयर हुआ, जिससे उत्पादन 389.87 लाख टन से बढ़कर 425.68 लाख टन हो गया। इसी तरह उत्तम बीज व तकनीक उपयोग से फसल पैदावार में उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ।
लघु प्रसंस्करण इकाइयाँ: प्रधानमंत्री PMFME योजना के तहत 7,435 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के ऋण आवंटन की प्रकिया पूरी की गई तथा 5,518 लाभार्थियों को तकनीकी सुविधा प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, सहकारी एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 3,113 सूक्ष्म उद्यमों को 108.64 करोड़ रुपये अनुदान लाभ दिया गया।
संरक्षित खेती: पिछली दो वर्षों में पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और ड्रीप सिंचाई आदि संरक्षित खेती के तहत 1,573 हितग्राहियों का सशक्तिकरण किया गया। इससे सब्जी, फूल और फल की खेती बढ़ी है और किसानों की आय में इजाफा हुआ है।
हॉर्टिकल्चर संवर्धन: छतरपुर की लिची, बैतूल के भरवाडिया धातु कला, ग्वालियर के पपीयर माचे जैसे स्थानीय उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ। खजुराहो के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक विरासतों को भी संवर्धित किया गया। कृषि मेलों, अनुसंधान केन्द्रों और नवाचार संस्थानों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों व पैदावार बढ़ाने वाली विधियों का प्रशिक्षण दिया गया।


लाड़ली बहना योजना: “लाड़ली बहना” योजना के अंतर्गत जनवरी 2024 से नवम्बर 2025 तक 1 करोड़ 26 लाख 36 हजार से अधिक बहनों के खातों में 46,775 करोड़ रुपये से अधिक राशि उपलब्ध कराई गई है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये सहायता देती है और प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को बल देती है।
गृहिणी सहायता: मुख्यमंत्री उज्ज्वला योजना तथा अन्य गैस सब्सिडी योजनाओं के अंतर्गत महिलाओं को प्रति सिलेंडर मात्र 450 रुपये में गैस रिफिल मिल रही है। अब तक 27 लाख से अधिक बहनों के खातों में 1,090 करोड़ रुपये से अधिक का रिफिल सब्सिडी का भुगतान हो चुका है। इस पहल से लगभग 27 लाख महिला परिवार लाभान्वित हुए हैं।
वात्सल्य मिशन का विस्तार: केंद्र की “प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना-वात्सल्य मिशन” को आगामी 5 वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। अब इस कार्यक्रम के अंतर्गत समय से बाहर बचे किशोरियों को मासिक 4,000 रुपये आर्थिक सहायता दी जाएगी।
अन्य महिला कल्याण: महिलाओं के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी हैं। मुख्यमंत्री कन्या अंत्येष्टि, मुख्यमंत्री नारी सम्मान जैसी योजनाओं से भी महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को प्रोत्साहन मिला है।


सड़क एवं परिवहन: मध्यप्रदेश में ग्रामीण एवं राष्ट्रीय राजमार्गों का दायरा व्यापक रूप से बढ़ाया गया है। अब तक कुल 23,720 किलोमीटर सड़क मार्ग का संपर्क सुनिश्चित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 225 किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कें बन चुकी हैं। स्वच्छ एवं सुरक्षित आवागमन हेतु प्रदेश में पहले ई-चालान एवं ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग प्रणाली लागू की गई है, और वाहनों के पंजीकरण/परमिट कार्यों के लिए “वाहन” एवं “सरथी” जैसी ऑनलाईन पोर्टल संचालित हैं।
जन परिवहन: आम जनता के लिए सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार हुआ है। देश में वाहनों के लाइसेंस कार्य पूर्णतः ऑनलाइन हो गए हैं तथा परिवहन संग्रह राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई है (वित्तीय वर्ष 2025-26 में अक्टूबर तक 2,541.74 करोड़ रुपये राजस्व, जो पिछली अवधि से अधिक है)।
ऊर्जा अवसंरचना: राज्य में बिजली वितरण ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए दो वर्षों में 222 नए 33/11 केवी उपकेन्द्र बनाए गए, 3,857 किमी 33 केवी और 15,254 किमी 11 केवी वितरण लाइनें बिछाई गईं, तथा 18,490 नए वितरण ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए। साथ ही विद्युत कंपनियों के पुनर्गठन के दौरान 51,711 नए स्थायी पदों की नियुक्ति की गई।


सौर कृषि पंप: मुख्यमंत्री कृषक ऊर्जा योजना के तहत 1 लाख सौर कृषि पंप किसानों को उपलब्ध कराए गए और प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा के तहत “सूरज” मिशन को लागू किया गया। इससे बिजली बचत के साथ ही सिंचाई सुविधा हुई है।
नवीकरणीय ऊर्जा: प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु मध्यप्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा नीति-2025 जारी की गई। सौर, पवन, बायोमास आदि परियोजनाओं के कारण उद्योग निवेश में बढ़ोतरी हुई है। उदाहरणतः सतपुड़ा और अमरकंटक थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट के दो नए ब्लॉक के लिए कुल 23,000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
मुफ्त बिजली योजना: अटल सौर ऊर्जा योजना के तहत करीब 9.03 लाख ग्रामीण उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है। अटल कृषि योजना से लगभग 26.59 लाख किसान उपभोक्ता मुफ्त बिजली के लाभार्थी बने हुए हैं।

सिंचाई विस्तार: पिछले दो वर्षों में 7.31 लाख हेक्टेयर में नई सिंचाई सुविधाएं विकसित की गईं तथा विभागीय कोष से 3.79 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बनाई गई। इसके फलस्वरूप हर खेत तक पानी पहुंचाने की दिशा में बड़े पैमाने पर कार्य हुआ है।
महत्वपूर्ण परियोजनाएँ: केन-बेतवा और तापी-बेतवा जलसंभरण परियोजनाओं के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से पूर्ण समर्थन प्राप्त किया है। दोनों चरणों में इस परियोजना के कार्यों को समेकित करने के लिए प्रशासनिक मंजूरी जारी की गई है। इसके अलावा छोटी-बड़ी अनेक नहरों और जलाशयों का निर्माण व क्रियान्वयन जारी है।
राष्ट्रीय पुरस्कार: उच्च सिंचाई कवरेज के लिए मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय जल क्षेत्र पुरस्कारों में शीर्ष स्थान दिया गया है। राज्य के “हर खेत को पानी” अभियान के तहत नल-कलव- जोड़कर 21,669 गांवों को पानी की सीधी आपूर्ति से हर घर को जलमग्न घोषित किया गया।
शैक्षणिक विस्तार: राज्य में अनेक नए सहायक महाविद्यालय, शैक्षणिक केंद्र और कौशल प्रशिक्षण संस्थान खोले गए हैं। छिंदवाड़ा में नींबूवायु, हरदा में विशेष फलोत्पादन केंद्र एवं इतर जिलों में कृषि शैक्षिक संस्थानों की स्थापना करके ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाया गया है। IIT इंदौर के सहयोग से 68 महाविद्यालयों में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं फिनटेक’ विषय पर 90 डिग्री/प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चलाए गए।
तकनीकी शिक्षा: विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय नयी शिक्षा नीति के अंतर्गत 35 व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए गए, जिससे लगभग 3.85 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हुए। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों और उध्यमिता परिकरमाओं के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
डिजिटल शिक्षा: शिक्षा विभाग में भी मोबाइल कक्षाएं, स्मार्ट स्कूल, ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और एकल विद्यार्थियों के लिए शिक्षण पोर्टल जैसे कदम उठाए गए हैं। इन पहलों से लाखों छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता युक्त सीखने की सुविधाएं मिली हैं।
चिकित्सा सुविधाएं: राज्य में चार नए चिकित्सा महाविद्यालयों (नीमच, मंदसौर, छतरपुर, सवनी) का निर्माण पूर्ण हुआ है। इससे ग्रामीण व दूरस्थ इलाकों में मेडिकल शिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ी है।
महिला-स्वास्थ्य योजनाएँ: मातृ- एवं बाल स्वास्थ्य सुधार हेतु समूह-जननी जैसी योजनाओं का लाभ लाखों गर्भवती माताओं और नवजातों तक पहुँचाया गया है। मुख्यमंत्री जननी सेवा योजना के अंतर्गत हजारों परिवारों को आर्थिक सहायता व स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा मिली है।
आयुष सेवाएँ: आयुष विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी आदि उपचारों को प्रोत्साहन मिला है। इन योजनाओं से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक औषधालयों का जाल फैला है और हजारों लाभार्थी जनता आयुष दवाओं से लाभांवित हुई है।
विमान परिवहन: प्रधानमंत्री “वंदे भारत एयर सेवा” योजना के तहत अब मध्यप्रदेश के आठ नगर- भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और खजुराहो – एक साथ वायुमार्ग से जुड़ गए हैं। इन शहरों के लिए IRCTC से ऑनलाईन उड़ान टिकट बुकिंग शुरू होने से पर्यटन और व्यापार दोनों को प्रोत्साहन मिला है।
धरोहर संवर्धन: खजुराहो के प्राचीन नृत्य कलाएँ और ग्वालियर की पपीयर माचे कला को जीआई टैग प्रदान किया गया। लोकमाता अहिल्याबाई के सम्मान में 300 रुपये के डाक टिकट और 300 रुपये के सिक्का जारी किए गए। उज्जैन में नए वेधशाला एवं तारामंडल का लोकार्पण हुआ, जिससे खगोलीय पर्यटन को बढ़ावा मिला। रानी दुर्गावती, भगवा झंडा चौधरी, बिरसा मुंडा जैसे आदिवासी नायकों की 300वीं, 400वीं आदि जयंति उत्सव राज्यव्यापी रूप से उल्लासपूर्वक मनाए गए।
नए पथ: रामायण में वर्णित 1,450 किमी लंबा “राम वन गमन पथ” परियोजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत भगवान श्री राम के कथानक स्थलों को तीर्थ-स्थली स्वरूप में विकसित किया जाएगा। 2025-26 के बजट में “श्रीराम पथेय योजना” हेतु 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
संस्कृतिक आयोजन: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में गिनीज विश्व रिकार्ड दर्ज किया गया। धार्मिक-सांस्कृतिक मेले एवं कला-उत्सवों का आयोजन बढ़ाया गया है। छिंदवाड़ा के कोरीवाला भैला (बैल उत्खनन) और बैतूल के भरवाड़िया लौह-शिल्प को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ। इन आयोजनों से पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ी है।
ई-गवर्नेंस: परिवहन विभाग में वाहन पंजीकरण, परमिट एवं ड्राइविंग लाइसेंस आदि सेवाओं को ‘वाहन’ व ‘सरथी’ नामक ऑनलाईन पोर्टलों से जोड़ा गया है। अब नागरिक इन सेवाओं के लिए कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ई-चालान और शपथ: ऑनलाइन चालान प्रणाली लागू की गई है जिससे यातायात उल्लंघन हेतु निर्बाध कारवाई होती है। साथ ही प्रत्येक जिले में ड्राइविंग प्रशिक्षण प्राधिकरण स्थापित कर सुरक्षित वाहन चालक प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
नवाचार पहल: विज्ञान-कौशल क्षेत्र में युवा वैज्ञानिक सम्मेलन, हैकथॉन एवं स्टार्टअप सम्मेलनों का आयोजन हुआ। माइक्रो-स्कॉलरशिप पोर्टल, डिजिटल हेल्थ रजिस्ट्रेशन प्रणाली और ई-प्रशासन संबंधी कई नए ऐप/पोर्टल कार्यान्वित किए गए हैं। इन पहलों से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ी है।
उपरोक्त पहलों और योजनाओं से मध्यप्रदेश में सर्वांगीण विकास की नई क्रांति आई है। खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा व पर्यटन जैसे सभी क्षेत्रों में ठोस बदलाव दिख रहे हैं, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा आंकड़ों के साथ निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि राज्य में गरीब, किसान, महिला, युवा एवं पिछड़े वर्ग सहित सभी को विकास का लाभ मिल रहा है।