Home Madhya Pradesh किसान आंदोलन में बने पंडाल को दो किसानों ने बनाया मंडप, रचाई बेटे और बेटी की शादी

किसान आंदोलन में बने पंडाल को दो किसानों ने बनाया मंडप, रचाई बेटे और बेटी की शादी

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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

रीवा (मध्य प्रदेश): केंद्र सरकार के तीनों नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान तकरीबन 113 दिनों आंदोलन कर रहे हैं। किसान सरकार से अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते आंदोलन स्थल को ही अपना घर मान लिए हैं। हम ऐसा इलिए कह रहें हैं कि किसान आंदोलन का एक अनोखा मामला मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सामने आया है। यहां दो किसान अपने बेटे और बेटी की आपस में शादी तय कर लिया। मामला इतना ही होता तो भी गलीमत थी। दोनो किसानों ने अपने बेटे और बेटी की शादी आंदोलन में बने पंडाल को मंडप बनाकर कर दी।

इस दौरान वहां मौजूद किसानों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानून वापस नहीं ले लेती वह अपने सारे मांगलिक कार्यक्रम यहीं से करेंगे। आपको बता दें कि यह अनोखा मामला गुरुवार को रिवा में किसान आंदोलन के धरना स्थल पर देखने को मिला। रोज जहां सरकार के खिलाफ नारे लगाये जाते थे, गुरुवार को वहां मंगल गीत गाए गए और डीजे पर डांस किया गया।

आंदोलन वाले मंच पर दूल्हा-दुल्हन माला लेकर खड़े थे। दूल्हा-दुल्हन जैसे ही वहां पहुंचे उनपर फूलों की बारिस होने लगी, औऱ शादी की सारी रस्में निभाई गईं। इस शादी में दूल्हा कोई और नहीं बल्कि मध्य प्रदेश किसान सभा के महासचिव रामजीत सिंह के बेटे सचिन सिंह थे। मध्य प्रदेश किसान सभा के महासचिव रामजीत सिंह किसान विष्णुकांत सिंह की बेटी आसमा से अपने बेटे का रिश्ता तय कर दिया था।

आपको बता दें कि दोनों किसान आंदोलन के चलते रीवा की करहिया मंडी में पिछले 75 दिन से धरना दे रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अपने बेटा-बेटी की शादी भी किसान आंदोलन के धरने स्थल से करने से तय कर लिया। कहा कि इससे हमारे किसान भाइयों में एक अच्छा संदेश जाएगा और उनको हिम्मत मिलेगी।

इस शादी में दूल्हा-दुल्हन ने मंत्रों के साथ संविधान की शपथ ली। जबकि संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर एवं शिक्षा की देवी सावित्री बाई फुले की फोटो के सात फेरे लिए गये। दूल्हे के पिता रामजीत सिंह ने कहा कि वह सरकार को यह संदेश देना चाहते हैं कि बिना कानून वापसी आंदोलन से नहीं हटेंगे। अपन हक लेकर ही रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस शादी में मैंने कोई दहेज नहीं लिया  है। हम किसान भाईयों को कुरीतियों से भी लड़ना है।

 

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