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Tokyo Olympics: लवलीना के पंच के सामने बेबस हुई निएन चिन, भारत के लिए सुनिश्चित किया पदक

भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोर्गोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है और भारत के लिए एक पदक पक्का कर लिया है। आपको बता दें कि शुक्रवार को 69 किलो वेल्टरवेट कैटेगरी के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे की निएन चिन चेन को 4-1 से शिकस्त दी। सेमीफाइनल में लवलीना का सामना बुधवार को मौजूदा विश्व चैम्पियन तुर्की की बुसेनाज सुरमेनेली से होगा।

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोर्गोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है और भारत के लिए एक पदक पक्का कर लिया है। आपको बता दें कि शुक्रवार को 69 किलो वेल्टरवेट कैटेगरी के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे की निएन चिन चेन को 4-1 से शिकस्त दी। सेमीफाइनल में लवलीना का सामना बुधवार को मौजूदा विश्व चैम्पियन तुर्की की बुसेनाज सुरमेनेली से होगा।

आपको बता दें कि पहले रांउड में लवलीना चीनी ताइपे की मुक्केबाज पर भारी पड़ीं। भारतीय बॉक्सर ने कुछ बेहतरीन राइट और लेफ्ट हुक जड़े. दूसरी ओर निएन चेन ने भी अटैक करने की कोशिश की, लेकिन लवलीना के डिफेंस का तोड़ नहीं ढूंढ पाई। पहले रांउड में तीन जजों ने लवलीना और दो जजों ने विपक्षी मुक्केबाज को बेहतर माना।

दूसरे राउंड में भारतीय बॉक्सर पूरी तरह अपने विपक्षी खिलाड़ी पर हावी रहीं। पांचों जजों ने लवलीना के प्रदर्शन को बेहतर माना। दो राउंड में बढ़त हासिल करने के बाद लवलीना ने डिफेंसिव होकर खेलना उचित समझा। निएन चिन चेन ने कुछ पंच जड़ने की कोशिश की, लेकिन लवलीना ने इन प्रयासों का खूबसूरती से बचाव किया। तीसरे राउंड में चार जजों ने लवलीना के पक्ष में फैसला दिया।

लवलीना को पहले जज ने 30, दूसरे ने 29, तीसरे ने 28, चौथे ने 30 और पांचवें जज ने 30 अंक दिए। वहीं, निएन चिन को पहले जज ने 27, दूसरे ने 28, तीसरे ने 29, चौथे ने 27 और आखिरी जज ने भी कुल 27 अंक दिए।

असम की 23 साल की मुक्केबाज लवलीना बोरगोहोन की निएन चिन चेन के खिलाफ यह पहली जीत है। इससे पहले लवलीना ने तीन मौकों पर निएन का सामना किया था, जिसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी थी।

लवलीना बोरगोहेन ओलंपिक की मुक्केबाजी इवेंट में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय बॉक्सर हैं। इससे पहले विजेंदर सिंह और एमसीसी मैरीकॉम यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। सबसे पहले विजेंदर सिंह ने बीजिंग ओलंपिक (2008) के मिडिलवेट कैटेगरी में कांस्य पदक जीता था। 2012 के लंदन ओलंपिक में एमसीसी मैरीकॉम ने फ्लाइवेट कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था।

लवलीना ने मार्च 2020 में आयोजित एशिया/ओसनिया ओलंपिक क्वालिफायर के सेमीफाइनल में पहुंचकर टोक्यो के लिए क्वालिफाई किया था। लवलीना ने क्वार्टर फाइनल में उज्बेकिस्तान की मफतुनाखोन मेलिएवा को 5-0 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की। हालांकि इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में लवलीना चीनी मुक्केबाज होंग गु से हार गई थीं, जिसके चलते उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

दो बॉक्सर भी मेडल जीतने के करीब

भारतीय मुक्केबाजों में पूजा रानी और सतीश कुमार भी क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं। अपने अगले मुकाबले को जीतते ही इन दोनों का भी मेडल पक्का हो जाएगा। पूजा रानी ने बुधवार को 75 किलो मिडिलवेट कैटेगरी में अल्जीरिया की इचरक चाईब को 5-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई।

वहीं, सतीश कुमार ने 91 किलो हैवीवेट कैटेगरी में जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। गुरुवार को खेले गए रांउड-16 के मुकाबले में सतीश ने जमैका के मुक्केबाज रिकार्डो ब्राउन को 4-1 से मात दी।

 

लवलीना के सेमीफाइनल में पहुंचते ही उन्हें बधाई मिलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। लवलीना ने भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक में दूसरा मेडल पक्का किया है। पूर्व खेल मंत्री किरण रिजिजू ने लवलीना की जीत को शानदार करार दिया है।

आपको बता दें कि लवलीना का जन्म असम के गोलाघाट जिले में 2 अक्टूबर 1997 को हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक किक-बॉक्सर के रूप में की थी। उनकी दोनों बहनें किक-बॉक्सर हैं। उनके पिता एक छोटे व्यापारी हैं ऐसे में उनके लिए अपनी बेटी के ख्वाब को पूरा करना काफी संघर्षपूर्ण था। हालांकि लवलीना ने खुद ही इस मौके का फायदा उठाया। जब स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ट्रायल उनके स्कूल में हुए तो उन्होंने काफी प्रभावित किया।

साई मे सिलेक्ट होने के बाद पदम बोरो ने उन्हें साल 2012 में ट्रेनिंग देनी शुरू की। उन्होंने बॉक्सिंग अकादमी में ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। इंटरनैशनल स्टेज पर पहुंचने केबाद उन्हें भारतीय महिला बॉक्सिंग के मुख्य कोच शिव सिंह ने ट्रेनिंग दी।

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