रिपोर्ट: मोहम्मद आबिद
बाराबंकी: शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा। यह पक्तियां किसी भी शहीद के स्मारक को देखकर अचानक जहन में आ जाती हैं। मगर अफसोस यह है कि बाराबंकी जनपद में यह लाइनें सूट नहीं करती हैं। क्योंकि यहां शहीद की मजार ही नहीं, तो कैसे लगे इस पर हर बरस मेले।
सालों पहले बाराबंकी जिले का एक रणबांकुरा देश के लिए अपनी शहादत देने के बाद अब अपनी पहचान के लिए आज भी देश के अंदर जंग लड़ रहा है। जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में देश की रक्षा करते-करते आतंकवादियों की गोली का शिकार होने के बाद इस शहीद की याद में स्मारक बनाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से भूमि दी गई थी, लेकिन आज तक इस जमीन पर न तो शहीद की स्मारक बना और न ही परिवार को आर्थिक मदद मिली है।

बाराबंकी में दरियाबाद थाना क्षेत्र के तेलमा गांव का है। जहां जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में शहीद हुए मोहम्मद शरीफ के स्मारक की भूमि को लेकर विवाद चल रहा है। तेलमा गांव के निवासी सेना में नायब सूबेदार मोहम्मद शरीफ कुपवाड़ा सेक्टर में साल 2002 में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गये थे। शहीद स्मारक के लिए गांव के बाहर जमीन ने भूमि दी थी। लेकिन उस जमीन पर गांव के दूसरे लोग आज तक कब्जा जमाए हैं और जिसके चलते शहीद का न तो स्मारक ही वहीं बन सका और न ही उसके परिवार की ही कोई मदद की जा रही है।

इसी को लेकर आज जिले में आयोजित चौरी-चौरी महोत्सव के दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और जिले के प्रभारी मंत्री दारा सिंह चैहान से भी मिलकर शहीद की पत्नी ने मिलकर मदद मांगी है। जिसपर मंत्री ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। आपको बता दें कि शहीद के दोनों बेटे भी आर्मी में ही तैनात हैं।