बड़वानी के जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में हैं। यहां प्रतिदिन 600 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि करीब 300 मरीज भर्ती रहते हैं। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में कचरा निपटान की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई नजर आ रही है। जगह-जगह कचरे के अड्ढे बन गए हैं और अस्पताल भवन के सामने जलभराव की समस्या भी बनी हुई है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल के ट्रामा सेंटर के पास कचरे का ढेर लंबे समय से साफ नहीं हो पा रहा है, जिससे वहां कुत्ते और मवेशी मंडराते रहते हैं। इससे न केवल गंदगी फैल रही है, बल्कि मवेशियों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि कचरे के पास ही ऑक्सीजन प्लांट, डॉक्टरों के आवास और अस्पताल की रसोई स्थित है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है। तेज हवा के साथ कचरे के हानिकारक कण रसोई तक पहुंच सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिमपूर्ण है।

वहीं, नए सोलह पलंग वार्ड के मुख्य द्वार के सामने जलभराव से मरीजों और परिजनों की आवाजाही बाधित हो रही है। जल जमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। इसके अलावा पोस्टमार्टम कक्ष और सिविल सर्जन कार्यालय के पास भी लंबे समय से कचरे का ढेर जमा है। पूर्व में यहां आग लगने की घटना भी हो चुकी है, जिसमें एक पुरानी एंबुलेंस जलकर खाक हो गई थी।
इस स्थिति ने अस्पताल की स्वच्छता और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।