रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: भारत सरकार के तीनों नये कृषि कानूनों के खिलाफ 100 दिनों से भी ज्यादा से चल रहा आंदोलन, अब धिरे-धिरे अंतर्राष्ट्रीय होता जा रहा है। हाल ही में पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन पर किसानों के समर्थन में ट्वीट किया था, ग्रेटा ही नहीं इस आंदोलन पर रिहाना की निगाह जमीं थी, उन्होने भी किसान आंदोलन में किसानों के समर्थन ट्वीट किया था।
आपको बता दें कि हद तो तब हो गई जब इस आंदोलन में मिया खलीफा जैसे लोग इस आंदोलन को लेकर अपनी राय देने लगे। किसान आंदोलन में इन लोगो की राय से देश में बवाल होने लगा। जिसके बाद देश के कई हस्तियों ने इनके राय का खंडन किया। जिस ट्वीटर के ये लोग इस्तेमाल किये थे, उसी ट्वीटर पर देश के सेलिब्रिटी #India Together और #India Against Propaganda को टैग कर ट्वीट किये थे।

इन सब के बीच किसान आंदोलन ब्रिटिश संसद में भी गूंजा, जिसके बाद भारत सरकार ने ब्रिटिश संसद में हुई इस चर्चा पर सख्त एतराज जताया है। आपको बता दें कि लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इस मुद्दे पर चर्चा की कड़ी आलोचना की है। भारत की ओर की ओर से कहा गया कि संसद में चर्चा के दौरान एकतरफा और झूठे तथ्य रखे गए हैं। जबकि दूसरी ओर ब्रिटिश सरकार में मंत्री नाइजल एडम्स ने कहा कि कृषि सुधार भारत का आंतरिक मुद्दा है।
दरअसल, किसान आंदोलन के लेकर ब्रिटेन संसद में एक पेटिशन पर लाखों दस्तखत हुए। जिसके बाद सोमवार को इस मुद्दे पर संसद में बहस हुई। भारतीय उच्चायोग ने बयान जारी कर कहा कि ब्रिटेन की संसद में जो बहस हुई, वह बिना तथ्यों के की गई। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, ऐसे में भारत के आंतरिक मुद्दे पर चर्चा करना निंदनीय है।
वहीं ब्रिटिश सरकार के मंत्री नाइजर एडम्स ने कहा कि “भारत-ब्रिटेन की दोस्ती काफी पुरानी है। दोनों ही देश आपसी सहयोग से द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं। आपको बता दें कि एडम्स ने उम्मीद जताई कि जल्द ही भारत सरकार और आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच बातचीत के जरिए कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा।“