कटनी में बागेश्वर धाम से नीलकंठेश्वर धाम तक विशाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया। ग्रोवर परिवार ने स्वागत कर भंडारे का आयोजन किया।
कटनी में बागेश्वर धाम से नीलकंठेश्वर धाम तक विशाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया। ग्रोवर परिवार ने स्वागत कर भंडारे का आयोजन किया।
टीकमगढ़ प्रवास के दौरान प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने कुण्डेश्वर धाम में भगवान शिव के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने जिले की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सर्वांगीण विकास की कामना करते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ मंदिर में पूजा की।
श्रावण मास के पहले सोमवार पर पन्ना के ऐतिहासिक चौमुखनाथ महादेव धाम में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। पूरे दिन मंदिर परिसर शिवभक्ति और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
सावन की पहली सोमवारी पर सासाराम के कैमूर पहाड़ी स्थित गुप्ता धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गुप्तेश्वर महादेव के प्राकृतिक शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए सुबह तक 50 हजार से अधिक भक्त पहुंच चुके थे। प्रशासन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की संभावना को देखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं।
सावन की पहली सोमवारी पर बांका के अमरपुर स्थित बाबा ज्येष्ठगौरनाथ महादेव मंदिर में करीब 10 हजार कांवरियों ने गंगाजल से जलाभिषेक किया। क्षेत्र के कई शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा व भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए।
सावन की पहली सोमवारी पर राजद नेता तेजस्वी यादव सोनपुर के प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उन्होंने राज्य की सुख-शांति और जनता के कल्याण की कामना की। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए।
सावन 2026 के पहले सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम, वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या समेत कई धार्मिक स्थलों पर भक्तों ने जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए।
देशभर में काल भैरव जयंती श्रद्धा और भक्ति से मनाई जा रही है। भक्त भैरव बाबा को उनके प्रिय भोग जैसे इमरती, उड़द की खिचड़ी, और काले तिल अर्पित कर सुख-समृद्धि और दोषों से मुक्ति की कामना कर रहे हैं।
देवों के देव महादेव जिन्हें संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव को सृष्टि का संहारक माना जाता है इसलिए उन्हें महाकाल भी कहा जाता है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति भगवान शिव हैं।