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पहली बारिश में खुली सिस्टम की पोल, घरों और दुकानों में घुसा बाढ़ का पानी

बैतूल के कोथलकुण्ड में पहली बारिश में ही पुल पर मलबा फंसने से बाढ़ जैसे हालात बन गए। घरों और दुकानों में पानी घुसा, ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

By: BS Yadav 
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पहली बारिश में खुली सिस्टम की पोल, घरों और दुकानों में घुसा बाढ़ का पानी

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मानसून की पहली तेज बारिश ने ही प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी। भैंसदेही जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कोथलकुण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने पुल पर बाढ़ के साथ बहकर आए लकड़ी, झाड़ियां और अन्य मलबा फंस जाने से नदी की जलनिकासी बाधित हो गई। इसके चलते नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा और आसपास के घरों व दुकानों में घुस गया।

ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ का पानी संजू सराटकर और सुखदेव सराटकर के घरों में घुसने से घरेलू सामान भीगकर खराब हो गया। वहीं, कैलाश राठौर की दुकान में रखा अनाज भी पानी की चपेट में आने से नुकसान हुआ। लगातार बारिश के कारण सड़क पर कीचड़ और फिसलन फैल गई है, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान पुल में मलबा फंसने से जलनिकासी रुक जाती है और बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग समय रहते पुल की सफाई नहीं कराता और न ही स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम उठाया जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण हर साल उन्हें जान-माल के नुकसान का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान पूरी रात बाढ़ के डर में गुजरती है और घरों के साथ दुकानों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल पर जमा मलबा तत्काल हटाने और जलनिकासी व्यवस्था को सुचारु करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं होने पर बैतूल कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल एक जैसी स्थिति बनने के बावजूद जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और ग्रामीणों को इस स्थायी समस्या से आखिर कब राहत मिलेगी।

रिपोर्ट :-कमलाकर तायवाड़े

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