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नई पीढ़ी के साथ कैसे बात की जाए इसका तरीका श्री राम ने सिखाया है, पढ़िए क्या है तरीका

By: RNI Hindi Desk 
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नई पीढ़ी के साथ कैसे बात की जाए इसका तरीका श्री राम ने सिखाया है, पढ़िए क्या है तरीका

{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }

दूसरों को आदर देने के मामले में खूब उदार हो जाएं, इसमें कोई कंजूसी न रखें, बाबा तुलसीदास जी एक जगह लिख गए है-

“जदपि कबित रस एकउ नाही।
राम प्रताप प्रगट एहि माही” ।।

मतलब यह है कि यद्यपि मेरी इस रचना में कविता का एक भी रस नहीं है, इसमें रामजी का प्रताप प्रगट हो रहा है। फिर आगे लिखा-

सोई भरोस मोरे मन आवा।
केहि न सुसंग बड़प्पनु पावा।।

मेरे मन में यही एक भरोसा है कि सुसंग से भला किसने बड़प्पन नहीं पाया। मतलब जब आप अच्छे लोगो के साथ होते है तो बड़प्पन मिलेगा ही। बड़प्पन का मतलब ही है साथ रहने वालों को खूब आदर दें, और यह कला सीखी जा सकती है रामजी से।

रामदूत के रूप में अंगद लंका से लौट चुके थे, वे जोश-जोश में रावण के सामने सीताजी को दांव पर लगा गए थे। इस पर हो सकता था रामजी कहते कि यह तुमने क्या किया? लेकिन उन्होंने तो कमाल ही कर दिया। अंगद को बुलाया, पास में बैठाया और तब तुलसीदास जी ने लिखा,

“अति आदर समीप बैठारी।
बोले बिहसि कृपाल खरारी”।।

बड़े आदर के साथ अंगद को पास में बैठाकर हँसते हुए रामजी बोले..! यहां दो बातें आई है। एक तो आदर से बैठाया और दूसरा प्रसन्न मन से बात की। नई पीढ़ी के साथ कैसे बात की जाए यह तरीका श्रीराम इस प्रसंग से सीखा गए।

आजकल के बच्चे गलती भी कर सकते है। पर जब भी घर में उनसे बात करें, उनको सम्मान दीजिए और अपने भीतर प्रसन्नता रखिए। आप घर के बड़े है, वरिष्ठ है तो अपने पॉजिटिव वायब्रेशन बच्चो में इसी तरह उतार सकते है।

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