शिवपुरीः जिले में विकास के दावों की हकीकत आज भी प्यास से तड़पती जनता के रूप में सामने आ रही है। पिछले 25 वर्षों से जल संकट से जूझ रहे इस जिले में हालात इतने बदतर हैं कि आज भी लोग डब्बों और साइकिलों पर पानी ढोने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है, जब सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधि विकास की लंबी-चौड़ी कहानियां गिनाने में पीछे नहीं रहते।
समाजसेवी एवं गौ सेवक कल्लू महाराज ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा है कि “यह विकास नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा अन्याय और अपराध है।” उनका कहना है कि जहां एक ओर सरकारें करोड़ों रुपये की योजनाओं का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता बुनियादी जरूरत पानी के लिए संघर्ष कर रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है। कई गांवों में नल-जल योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, जबकि हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या पानी देना बंद कर चुके हैं। महिलाएं और बच्चे रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। यह नजारा किसी पिछड़े युग की याद दिलाता है, जबकि हकीकत में हम डिजिटल और विकासशील भारत की बात करते हैं।
कल्लू महाराज ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि वर्षों पुराने कार्यों और योजनाओं का हवाला देकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। “250 साल की उपलब्धियां गिनाने से वर्तमान की प्यास नहीं बुझती,” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा। उन्होंने यह भी मांग की कि जल संकट को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं फिर नजरअंदाज कर दी जाती हैं। जल संकट जैसी गंभीर समस्या पर ठोस योजना और त्वरित अमल की जरूरत है, जो अब तक नहीं दिखा।
कार्रवाई की मांग: जनता और समाजसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़ी जल योजनाओं को तुरंत चालू किया जाए। खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई जाए। नई जल आपूर्ति योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। शिवपुरी की प्यास अब सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि जवाबदेही और न्याय की भी है।
शिवपुरी से संवाददाता कुलदीप गुप्ता की रिपोर्ट