गुना जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झागर में पदस्थ शिक्षक अवधेश अवस्थी का चयन मध्य प्रदेश सरकार ने विज्ञान मंथन यात्रा में किया किया गया था। राज्य सरकार द्वारा चयनित 27 शिक्षकों में से गुना जिले से एकमात्र शिक्षक अवधेश अवस्थी का चयन हुआ और राज्य शासन द्वारा 10 से 12 तक के 377 विद्यार्थियों का यह प्रतिनिधि मंडल 21 से 27 अप्रैल तक बेंगलुरु चेन्नई एवं श्रीहरिकोटा का शैक्षणिक भ्रमण किया। अवधेश अवस्थी इस विज्ञान मंथन यात्रा में मार्गदर्शन शिक्षक के रूप में सम्मिलित हुए।

सात दिवसीय यात्रा से लौटने पर श्री अवस्थी का विद्यालय में प्राचार्य भार्गव एवं समस्त स्टाफ सदस्यों ने सम्मान किया और इस उपलब्धि के लिए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की। अवस्थी ने बताया कि यह यात्रा केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि तीन आयामों में विकसित एक सशक्त शिक्षण प्रक्रिया है। ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब इसके तीन प्रमुख दिवसों के प्रतिवेदनों में दिखाई देता है।
प्रथम चरण में जब प्रतिभागियों ने बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों का अवलोकन किया, तब उन्हें उपग्रह निर्माण, मिशन योजना, नेविगेशन प्रणाली तथा इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित होने का अवसर मिला।
द्वितीय चरण में चेन्नई के बिरला तारामंडल एवं अन्य वैज्ञानिक संस्थानों का भ्रमण, खगोल विज्ञान की गहराइयों से साक्षात्कार का माध्यम बना। यहां ब्रह्मांड की संरचना, ग्रहों की गति, तारों की उत्पत्ति और अंतरिक्ष के रहस्यों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से समझाया गया।
तृतीय और सबसे महत्वपूर्ण चरण में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र का भ्रमण, इस यात्रा का चरम बिंदु सिद्ध हुआ। यहां प्रथम एवं द्वितीय लॉन्च पैड की कार्यप्रणाली, रॉकेट प्रक्षेपण की सूक्ष्मतम तकनीकी प्रक्रियाएं तथा मिशन कंट्रोल की सटीकता ने प्रतिभागियों को अभिभूत कर दिया। जिन रॉकेटों को अब तक केवल समाचारों और पुस्तकों में देखा था, उन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर विद्यार्थियों के लिए जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
शिक्षक अवधेश कुमार अवस्थी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए “किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक विज्ञान को समझने का सशक्त माध्यम” है। वहीं चयनित विद्यार्थियों के उत्साह और जिज्ञासा ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि उन्हें सही दिशा और अवसर मिले, तो वे भविष्य में देश के वैज्ञानिक परिदृश्य को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
‘विज्ञान मंथन यात्रा’ का मूल उद्देश्य भी यही है—प्रतिभा की पहचान, उसका पोषण और उसे अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में अग्रसर करना। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचने और समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।
गुना से संवाददाता रणधीर चंदेल की रिपोर्ट