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गैस सिलेंडर के लिए जंग! 20-30 किमी दूर से पहुंचे उपभोक्ता, एजेंसी की खोली व्यवस्था की पोल

निवाड़ी के तरीचर कलां की गौरी इंडेन गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने के लिए 20-30 किमी दूर से पहुंचे उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ी। होम डिलीवरी, ब्लैक में सिलेंडर और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे।

By: BS Yadav 
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गैस सिलेंडर के लिए जंग! 20-30 किमी दूर से पहुंचे उपभोक्ता, एजेंसी की खोली व्यवस्था की पोल

निवाड़ी। सरकार जहां रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने का दावा कर रही है, वहीं निवाड़ी के तरीचर कलां स्थित गौरी इंडेन गैस एजेंसी पर उमड़ी उपभोक्ताओं की भीड़ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में लोग एजेंसी पहुंचे। उपभोक्ताओं के मुताबिक उन्हें करीब 20 से 30 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद भी घंटों लाइन में लगकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है।

होम डिलीवरी के पैसे, फिर भी एजेंसी पहुंच रहे उपभोक्ता

उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी के नाम पर शुल्क लिया जाता है, लेकिन सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचाया जाता। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब उपभोक्ता होम डिलीवरी का शुल्क दे रहे हैं तो उन्हें इतनी दूर से सिलेंडर लेने एजेंसी तक क्यों आना पड़ रहा है।ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर परेशानी का कारण बन रही है। एजेंसी परिसर में दिखाई दी भीड़ इस परेशानी की तस्वीर सामने रखती है।

दूसरे कनेक्शन पर सिलेंडर ब्लैक करने के आरोप

एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ उपभोक्ताओं और सूत्रों की ओर से गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि दूसरे उपभोक्ताओं के कनेक्शन पर सिलेंडर ब्लैक किए जा रहे हैं। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला उपभोक्ताओं के अधिकारों और गैस वितरण व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। ऐसे में वितरण रिकॉर्ड और संबंधित कनेक्शनों की जांच जरूरी होगी।

एजेंसी कर्मचारी ने होम डिलीवरी नहीं होने की बात मानी

मामले को लेकर एजेंसी कर्मचारी विनोद गुप्ता से बात की गई। उन्होंने होम डिलीवरी नहीं होने की बात स्वीकार की। वहीं बिना बुकिंग के सिलेंडर नहीं दिए जाने को लेकर उन्होंने अपना पक्ष रखा।इसके बाद सवाल उठता है कि यदि उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी का शुल्क लिया जा रहा है और इसके बावजूद डिलीवरी नहीं हो रही, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या उपभोक्ताओं से लिया गया शुल्क वापस किया जाता है और क्या एजेंसी की होम डिलीवरी व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है?

गैस गोदाम की सुरक्षा पर भी सवाल

गैस एजेंसी के गोदाम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मौके पर अग्निशमन यंत्र दिखाई दिए, लेकिन उनकी वैधता, सर्विसिंग और एक्सपायरी डेट को लेकर सवाल सामने आए हैं। इसके अलावा स्टॉक सूची के प्रदर्शन को लेकर भी आपत्तियां जताई गई हैं। गैस जैसी ज्वलनशील सामग्री के भंडारण वाले स्थान पर सुरक्षा मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर की लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में मामले में सुरक्षा उपकरणों और उनके रखरखाव की जांच भी जरूरी है।

कर्मचारियों की सुविधाओं पर भी उठे सवाल

एजेंसी में काम करने वाले कर्मचारियों के ड्रेस कोड और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि गैस एजेंसी के संचालन में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है तो संबंधित विभाग की ओर से इसकी जांच की आवश्यकता है।

खाद्य आपूर्ति विभाग ने दिया जांच का भरोसा

मामले को लेकर जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी सरिता अग्रवाल से बात की गई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है।अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि एजेंसी पर लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है और वहां गैस वितरण, होम डिलीवरी, स्टॉक तथा सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। उपभोक्ताओं की मांग है कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर पहुंचकर गैस वितरण, होम डिलीवरी, स्टॉक रिकॉर्ड, सुरक्षा उपकरण और उपभोक्ताओं से लिए जा रहे शुल्क की पूरी पड़ताल की जाए।

रिपोर्ट: देवेश गुप्ता,

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