1. हिन्दी समाचार
  2. Breaking News
  3. संत राजेंद्र दास जी महाराज का बड़ा बयान, गौ रक्षा, प्राकृतिक खेती और शिक्षा पर रखे विचार

संत राजेंद्र दास जी महाराज का बड़ा बयान, गौ रक्षा, प्राकृतिक खेती और शिक्षा पर रखे विचार

ओरछा में आयोजित कथा के दौरान संत राजेंद्र दास जी महाराज ने गौ रक्षा, प्राकृतिक खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

By: BS Yadav 
Updated:
संत राजेंद्र दास जी महाराज का बड़ा बयान, गौ रक्षा, प्राकृतिक खेती और शिक्षा पर रखे विचार

ओरछा: निवाड़ी जिले की धार्मिक नगरी ओरछा में आयोजित सप्त दिवसीय कथा के दौरान प्रख्यात संत राजेंद्र दास जी महाराज ने गौ रक्षा, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और सामाजिक विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि गाय केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला भी है।

गौ रक्षा के लिए समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी

संत राजेंद्र दास जी महाराज ने कहा कि गोवंश की रक्षा केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था या संगठन का कार्य नहीं है। इसके लिए समाज और प्रशासन को मिलकर प्रयास करने होंगे।उन्होंने कहा कि गोवध जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है तथा समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में गाय के महत्व को शामिल करने की वकालत

संत ने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और गौ आधारित जीवन पद्धति की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक गाय के महत्व और उसके सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक योगदान को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है।

चिकित्सा और पारंपरिक जीवनशैली पर दिया जोर

राजेंद्र दास जी महाराज ने चिकित्सा के क्षेत्र में गोबर और गौमूत्र की उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक भारतीय जीवनशैली में इनका विशेष महत्व माना गया है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक जीवनशैली के महत्व को समझने की आवश्यकता है। हालांकि चिकित्सा संबंधी दावों को लेकर उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव और मान्यताओं का उल्लेख किया।

गौशाला का अनुभव किया साझा

संत ने बताया कि उनके आश्रम में लगभग 15 हजार गोवंश हैं। उन्होंने कहा कि गौशाला आधारित जीवनशैली और अनुशासन के सकारात्मक अनुभव उन्हें मिले हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने आश्रम की व्यवस्थाओं और परंपराओं का भी उल्लेख किया।

जनसंख्या और सामाजिक विषयों पर भी रखे विचार

संत राजेंद्र दास जी महाराज ने जनसंख्या संतुलन और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

किसानों के लिए गौ आधारित प्राकृतिक खेती का सुझाव

कृषि विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भारतीय खेती मुख्य रूप से गौ आधारित थी, जिससे किसान आत्मनिर्भर रहते थे। गोबर खाद, बैलों और पारंपरिक संसाधनों के माध्यम से खेती की लागत कम रहती थी।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक खाद, बीज, डीजल और कृषि मशीनों पर बढ़ते खर्च ने किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। इसलिए गौ आधारित प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।संत ने सरकार से मांग की कि प्राकृतिक और गौ आधारित खेती अपनाने वाले किसानों को विशेष प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान की जाए, जिससे खेती की लागत कम हो और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...