नई दिल्ली : टोक्यो में हुए ओलंपिक मैच में सभी भारतीय खिलाडियों ने अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया, लेकिन उनमें से अधिकतर खिलाड़ियों का निराशा का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद हमारे खिलाड़ियों ने कई ऐतिहासिक क्षण दिये, जिसने भारत को गर्व करने का मौका दिया। हर खिलाड़ी की तरह तमिलनाडु की रहने वाली धावक धनलक्ष्मी भी अपने आंखों में मेडल के सपने संजोय गई थी। लेकिन उनका ख्वाब पूरा नहीं हुआ।
वहीं जब वो अन्य खिलाड़ियों के साथ वो भी वापस स्वदेश लौटी, इस दौरान उन्हें एक ऐसा झटका लगा जिसे वह ताउम्र नहीं भूल पाएंगी। आपको बता दें कि 22 वर्षीय इस ऐथीलट की बहन अब दुनिया में नहीं रही। घर आने के बाद जैसे ही उन्हें इसकी खबर लगी वह बुरी तरह टूट गईं।

12 जुलाई को हुई थी मौत
बता दें कि एथलेटिक्स में 4x400m मिक्स्ड रिले टीम का हिस्सा रही धनलक्ष्मी तिरुचिरापल्ली के नजदीक गुंडूर गांव की रहने वाली हैं। इवेंट्स खत्म होने के बाद जब वह रविवार को तोक्यो से वापस लौटीं तब घरवालों ने इस दुखद खबर के बारे में बताया। परिजन नहीं चाहते थे कि गायत्री की मौत की खबर धनलक्ष्मी को पता लगे, क्योंकि अगर ऐसा होता तो वह अपने खेल पर फोकस नहीं कर पाती।
बचपन में ही सिर से उठ गया पिता का साया
धनलक्ष्मी की उम्र बमुश्किल 10 साल रही होगी, जब उनके पिता का निधन हो गया। दिहाड़ी मजदूरी करके मां ने परिवार पाला। स्थानीय न्यूज चैनल से बातचीत में मां कहती हैं कि दोनों बहनों में बेहद प्यार था। गायत्री ही धनलक्ष्मी को हमेशा मोटिवेट करती, लेकिन अब सब खत्म हो गया।

तोड़ा था पीटी उषा का रेकॉर्ड
चयन ट्रायल्स के दौरान धनलक्ष्मी ने बेहतरीन खेल दिखाया था। एनआईएस पटियाला में उन्होंने पीटी उषा के राष्ट्रीय 200 मीटर हीट्स के रेकॉर्ड को तोड़ा था। पीटी उषा ने 23 साल पहले 23.30 सेकेंड का समय निकाल था, जिसे अब धनलक्ष्मी ने 23.26 के साथ सुधारा। साथ ही 100 मीटर में 11.39 के समय के साथ दुती चंद को हराकर गोल्ड भी जीता था।