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मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद RBI का बड़ा फैसला, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव; GDP वृद्धि दर का अनुमान…

मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा फैसला किया है, जिससे एक बार फिर रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एमएसएफ रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के प्रस्तावों को जारी करते हुए रेपो रेट (Repo Rate) को 4 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) को 3.35 फीसदी पर बनाए रखा है।

By: Amit ranjan 
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मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद RBI का बड़ा फैसला, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव; GDP वृद्धि दर का अनुमान…

नई दिल्ली : मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा फैसला किया है, जिससे एक बार फिर रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एमएसएफ रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के प्रस्तावों को जारी करते हुए रेपो रेट (Repo Rate) को 4 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) को 3.35 फीसदी पर बनाए रखा है। वहीं रिजर्व बैंक ने 2021-22 के लिए जीडीपी में ग्रोथ (GDP Growth) के अनुमान को भी 9.5 फीसदी पर बरकरार रखा है।

‘अर्थव्यवस्था संकट को दूर करना है’

बता दें कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की द्विमासिक तीन दिन की बैठक 4 अगस्त को शुरू हुई थी और 6 अगस्त तक चली है। आरबीआई के गवर्नर शशिकांत दास ने कहा कि, ‘’मौद्रिक नीति समिति ने मौद्रिक नीति के मामले में उदार रुख बनाये रखने का निर्णय किया है। हमारे कदम का मकसद वृद्धि को गति देना और अर्थव्यवस्था में संकट को दूर करना है।’’आपको बता दें कि आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।

 

‘टीकाकरण में गति के साथ आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी’

उन्होंने कहा कि, ‘’अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से लगे झटके से बाहर आ रही है, टीकाकरण में गति के साथ आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। अर्थव्यवस्था में आपूर्ति-मांग में सुतंलन बहाल करने के लिये काफी कुछ किये जाने की जरूरत है।’’

क्या मानना था विशेषज्ञों का?                                  

विशेषज्ञों का भी यही मानना था कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की आशंका और खुदरा मुद्रास्फीति के बढ़ने के बीच भारतीय रिजर्व बैंक इस सप्ताह प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति 6 अगस्त की समीक्षा में यथास्थिति को कायम रखेगी। इससे पिछली बैठक में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

जून में नहीं बदली थीं ब्याज दरें

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए उसे 4 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया था। वहीं रिवर्स रेपो रेट को 3.35 फीसदी पर बनाए रखा था। उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति का रुख लचीला बनाए रखेगा। ज्यादातर जानकारों का भी यही मानना था कि मौद्रिक नीति में केंद्रीय बैंक रेपो रेट में जून में कोई बदलाव नहीं करेगा।

क्या होता है रेपो रेट?

रेपो रेट (Repo Rate) वह रेट होता है, जिस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है। उसे रिप्रोडक्शन रेट या रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले सभी तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। रेपो रेट कम हाेने से होम लोन, व्हीकल लोन, पर्सनल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं। लेकिन इससे आपकी जमा पर ब्याज दर में भी बढ़ोतरी हो जाती है।

क्या होता है रिवर्स रेपो रेट?

जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट (Reverse repo rate) कहते हैं। बैंकों के पास जो अतिरिक्त नकदी होती है, उसे रिजर्व बैंक के पास जमा करा दिया जाता है। इस पर बैंकों को ब्याज भी मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आता है। बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है, ताकि बैंक उस नकदी को रिजर्व बैंक के पास जमा करा दे। यदि रिजर्व बैंक बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ाना चाहता है तो रिवर्स रेपो रेट घटा देता है।

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