मध्य प्रदेश राजभवन का नाम अब ‘लोक भवन’ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में शुक्रवार को राजभवन की नई पहचान को औपचारिक रूप दिया गया। यह परिवर्तन केंद्र सरकार की उस राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में औपनिवेशिक शब्दावली और प्रतीकों को हटाकर लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े नामों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
औपनिवेशिक नाम हटाकर ‘लोक’ का महत्व बढ़ाना
राजभवन नाम अंग्रेजी शासनकाल का अवशेष माना जाता है। इसे बदलते हुए अब ‘लोक भवन’ नाम दिया गया है, जो शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने का संदेश देता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया था। अब उसी क्रम में राजभवन के “राज” शब्द को हटाकर “लोक” शब्द लाया गया है-जो लोकतंत्र और जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है।
देश के आठ राज्यों और लद्दाख में भी बदला नाम
पिछले वर्ष राज्यपालों के सम्मेलन में किए गए निर्णय के अनुसार देश के आठ राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा में भी राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया गया है। वहीं लद्दाख में उपराज्यपाल के निवास का नाम बदलकर ‘लोक निवास’ रखा गया है।
MP में ‘लोक भवन’ की नई पहचान
राजभवन में लगी पुरानी पट्टिका हटाकर नई स्वर्णाक्षरी पट्टिका ‘लोक भवन’ स्थापित कर दी गई है। इसके साथ ही यह स्थान अब केवल औपचारिक सरकारी निवास नहीं, बल्कि एक ऐसा संस्थान माना जाएगा जो लोकतंत्रीय जीवन-मूल्यों और जनता से जुड़ाव का प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि- “यह बदलाव समय की मांग है। राजभवन का नया नाम इसे जनता के और करीब लाएगा।”
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि- “लोक भवन नाम लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनता के प्रतिनिधित्व का सशक्त संदेश देता है।”
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
सरकार का मानना है कि-
औपनिवेशिक नामों से मुक्ति की राष्ट्रीय पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में ब्रिटिश शासन से जुड़ी नामावली को बदलने की पहल चल रही है।