काठमांडू: यह बैठक पार्टी के धुंबराही स्थित केंद्रीय कार्यालय में हुई। बैठक में उनके ऊपर लगे आरोपों पर चर्चा होनी थी। ओली के सलाहकार सूर्य थापा ने बताया है कि प्रधानमंत्री अपने व्यस्त कार्यक्रम और कोविड-19 महामारी के खतरे के चलते स्टैंडिंग काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं हुए।
बैठक में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड द्वारा प्रधानमंत्री ओली पर लगाए आरोपों पर चर्चा होनी थी। ओली ने प्रचंड पर सरकार चलाने में सहयोग न करने और झूठे आरोप लगाने की बात कही है। ओली और प्रचंड ने शनिवार को प्रधानमंत्री आवास में हुई पार्टी की सचिव मंडल की बैठक में भाग लिया था लेकिन रविवार को पार्टी कार्यालय में प्रस्तावित बैठक में ओली नहीं पहुंचे।
प्रचंड ने ओली पर भ्रष्टाचार और मनमाने ढंग से सरकार चलाने का आरोप लगाया है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाले धड़े की मांग पार्टी के एक व्यक्ति-एक पद की व्यवस्था लागू करने की है, जिसके चलते ओली को एक पद छोड़ना होगा। ओली इस व्यवस्था को लागू नहीं होने दे रहे।
इस बीच नेपाल में राजशाही की बहाली की मांग को लेकर काठमांडू में प्रदर्शन हुआ है। लोगों ने राष्ट्रीय झंडे के साथ जुलूस निकालकर राजशाही को पुन: स्थापित करने और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग की है। दरअसल, ओली अपने चीन प्रेम और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड के साथ टकराव के चलते सवालों के घेरे में हैं। यही कारण है कि ओली सरकार के खिलाफ नेपाल की आवाम का गुस्सा रह रह कर सामने आ रहा है।
बीते दिनों ओली ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के समक्ष आरोपों पर अपना जवाब पेश किया था। उन्होंने 38 पेज का राजनीतिक दस्तावेज के तौर पर दिए अपने जवाब में पार्टी से विचार-विमर्श के बगैर मनमाने ढंग से सरकार चलाने के आरोप को खारिज कर दिया था। ओली ने कहा था कि वह सहमति बनाकर फैसले लेते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि प्रचंड समेत कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी चलाने में उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं।