{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
इस समस्त ब्रह्मांड की रचना खुद श्री हरि विष्णु ने की है और एक बार जब दुर्वासा ऋषि ने उनसे उनके कार्य के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि मैं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस सृष्टि से जुड़ा रहता हूँ लेकिन सञ्चालन मैं नहीं करता और ना ही मैं इससे प्रभावित होता हूँ।
इस सृष्टि का भौतिक रूप से सञ्चालन माया करती है। मनुष्य के जितने भी भोग और विकार है वो सब माया से प्रभावित है और आखिर में इंसान को उसी माया से पार पाकर श्री हरि विष्णु तक जाना होता है।
माया मनुष्य को भौतिक सुख देती है लेकिन उसी के साथ आते है कुछ विकार, क्यूंकि ब्रह्माण्ड असुर और देवता दोनों पर टिका है। अगर देव है तो असुर भी है।
अगर पाप है तो पुण्य भी है। अगर अंधकार है तो सूर्य का प्रकाश भी है। इस सृष्टि में सबको बराबर का हिस्सा मिला हुआ है और यह मनुष्य की बुद्धि और उसके ज्ञान पर निर्भर करता है की वह कैसे उस माया को संभालता है।
जब भौतिक सुख आते है तो उसी माया के प्रभाव से विकार भी आते है और सबसे बड़ा विकार होता है अभिमान। जब इंसान मन में यह सोच ले की अमुक कार्य तो बस मैं ही कर सकता था और कोई नहीं ! उसी समय यह जान लीजिए की माया हावी हो गई है।
अभिमान एक ऐसा विकार है जो इंसान को समूल नष्ट करने की ताकत रखता है। कुछ ऐसा ही अभिमान रावण को भी था। रावण को ऐसा लगता था कि उसके सिवा इस पुरे संसार में ना कोई ज्ञानी है और ना ही कोई योद्धा है।
इसी अभिमान के कारण रावण ने सीता का हरण कर लिया। उसके अंदर इतना अभिमान था की उसने राम जी और लक्ष्मण के बारे में कहा की वो वनवासी राम मेरा क्या बिगाड़ सकता है ? मेरा तो देवता भी कुछ नहीं बिगाड़ पाए !
जब मनुष्य के अंदर अभिमान आता है तो वो ज्ञानी और गुणी लोगों की भी नहीं सुनता ,रावण ने ना अपने भाई की सुनी और ना ही माल्यवान की। भाई विभीषण को तो उसने भरी सभा में लात मारकर निकाल दिया था।
इस अवगुण के कारण वही रावण जिसकी सभा में बड़े बड़े योद्धा नीची गर्दन करके उसके आदेश का पालन करते थे उसी रावण का सारा कुटुंब खत्म हो गया। रावण के इस अभिमान रुपी विकार ने उसका सब कुछ छीन लिया। इंद्रजीत जैसा पुत्र भी उसके अभिमान के कारण मारा गया।
इसलिए अगर इंसान यह चाहता है कि उसके परिवार का कुछ अहित नहीं हो तो सबसे पहले अभिमान रुपी विकार को अपने पास नहीं आने दे और अगर वो आपमें आ भी गया है तो वेद पुराण और शास्त्रों का अध्ययन करके उसे खत्म करें।
भगवान् राम को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि उन्होंने कभी अभिमान नहीं किया। रावण जब मृत्यु को प्राप्त हो रहा था तब भी उन्होंने लक्ष्मण को उसके पास राजनीति का ज्ञान लेने भेज दिया था।
यही एक असली गुणी व्यक्ति की खासियत होती है और अगर आप ऐसा करते है तो सदैव आपको समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा और आप कभी अकेले नहीं होंगे।