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Ambala : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राफेल लड़ाकू विमान में ऐतिहासिक उड़ान

Ambala : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला वायुसेना स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में विशेष उड़ान भरकर इतिहास रचा। यह कदम भारतीय वायुसेना के प्रति सम्मान और देश की रक्षा क्षमता पर विश्वास का प्रतीक है। राफेल विमान ऑपरेशन सिंदूर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर चुका है।

By: RNI Hindi Desk 
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Ambala : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राफेल लड़ाकू विमान में ऐतिहासिक उड़ान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक बार फिर इतिहास रचने जा रही हैं। वह अंबाला वायुसेना स्टेशन से अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान में विशेष उड़ान भरेंगी। यह उड़ान न केवल देश की सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनके कर्तव्य का प्रतीक है, बल्कि भारत की मजबूत रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता का संदेश भी देती है। राफेल अपनी उन्नत तकनीक, शानदार गति और सटीक मारक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।

राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, उड़ान के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू वायुसेना अधिकारियों से विमानों की तकनीकी क्षमताओं और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं की जानकारी भी प्राप्त करेंगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर रक्षा मंत्रालय और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति की यह उड़ान सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह कदम भारतीय वायुसेना के प्रति सम्मान और देश की रक्षा शक्तियों में उनके विश्वास का प्रतीक है।

यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति मुर्मू ने किसी लड़ाकू विमान में उड़ान भरी हो। इससे पहले, 8 अप्रैल 2023 को उन्होंने असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई विमान में 30 मिनट तक उड़ान भरी थी। इसके अलावा, मार्च 2023 में उन्होंने नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का भी दौरा किया था।

पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी इस तरह की प्रतीकात्मक उड़ानें भरी हैं। 2009 में प्रतिभा पाटिल सुखोई-30 में उड़ान भरने वाली पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं। उनसे पहले, 2006 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी पुणे में सुखोई-30 में उड़ान भरी थी।

फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल सितंबर 2020 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। फ्रांस से आए पहले पांच राफेल विमानों को 17 स्क्वाड्रन “गोल्डन एरो” में शामिल किया गया था। हाल ही में राफेल ने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई, जिसमें पाकिस्तान कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह भारत की बढ़ती हवाई शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली का स्पष्ट प्रमाण है।

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