पीएम मोदी आज रूस में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की वर्चुअल बैठक में शामिल हुए। चीन से चल रहे विवाद के बीच यह पहला मौका है जब पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग आमने-सामने हुए।
PM Shri @narendramodi's remarks at virtual SCO meeting. https://t.co/d2zxjgnkZT
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बता दें कि इस बैठक की अध्यक्षता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की। इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल हुए। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “SCO क्षेत्र से भारत का घनिष्ठ, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहा है। हमारे पूर्वजों ने इस साझा विरासत को अपने अथक और निरंतर संपर्कों से जीवंत रखा।”
SCO क्षेत्र से भारत का घनिष्ठ, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहा है।
हमारे पूर्वजों ने इस साझा विरासत को अपने अथक और निरंतर संपर्कों से जीवंत रखा।
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मोदी ने आगे कहा, “United Nations ने अपने 75 years पूरे किए हैं। लेकिन अनेक सफलताओं के बाद भी संयुक्त राष्ट्र का मूल लक्ष्य अभी अधूरा है। महामारी की आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से जूझ रहे विश्व की अपेक्षा है कि UN की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आए।”
United Nations ने अपने 75 years पूरे किए हैं।
लेकिन अनेक सफलताओं के बाद भी संयुक्त राष्ट्र का मूल लक्ष्य अभी अधूरा है।
महामारी की आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से जूझ रहे विश्व की अपेक्षा है कि UN की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आए।
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पीएम ने आगे कहा, “अभूतपूर्व महामारी के इस अत्यंत कठिन समय में भारत के फार्मा उद्योग ने 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाएं भेजी हैं। दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में भारत अपनी वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग इस संकट से लड़ने में पूरी मानवता की मदद करने के लिए करेगा।”
अभूतपूर्व महामारी के इस अत्यंत कठिन समय में भारत के फार्मा उद्योग ने 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाएं भेजी हैं।
दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में भारत अपनी वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग इस संकट से लड़ने में पूरी मानवता की मदद करने के लिए करेगा। pic.twitter.com/Yn3fLASpst
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मोदी ने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि SCO agenda में बार-बार अनावश्यक रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास हो रहे हैं, जो SCO Charter और Shanghai Spirit का उल्लंघन करते हैं। इस तरह के प्रयास SCO को परिभाषित करने वाली सर्वसम्मति और सहयोग की भावना के विपरीत हैं।”
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि SCO agenda में बार-बार अनावश्यक रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास हो रहे हैं, जो SCO Charter और Shanghai Spirit का उल्लंघन करते हैं।
इस तरह के प्रयास SCO को परिभाषित करने वाली सर्वसम्मति और सहयोग की भावना के विपरीत हैं।
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पीएम ने कहा, “भारत का मानना है कि कनेक्टिविटी को और अधिक गहरा करने के लिए यह आवश्यक है की एक दूसरे की संप्रभुता और टेरीटोरियल इंटीग्रिटी के सम्मान के मूल सिद्धातों के साथ आगे बढ़ा जाए।”
भारत का मानना है कि कनेक्टिविटी को और अधिक गहरा करने के लिए यह आवश्यक है की एक दूसरे की संप्रभुता और टेरीटोरियल इंटीग्रिटी के सम्मान के मूल सिद्धातों के साथ आगे बढ़ा जाए: पीएम @narendramodi pic.twitter.com/eQNWTgBJiN
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बता दें कि भारत आठ देशों के क्षेत्रीय समूह एससीओ के साथ अपने सहयोग का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसमें शामिल देशों की आबादी दुनिया की आबादी का लगभग 42 प्रतिशत है। साथ ही इन राष्ट्रों की जीडीपी वैश्विक जीडीपी का 20 प्रतिशत है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कुछ दिनों पहले कहा था कि भारत 30 नवंबर को एससीओ में शामिल देशों के प्रमुखों की एक शिखर बैठक की मेजबानी करेगा जिसमें वर्चुअल तौर पर सदस्य देशों के प्रधानमंत्री शामिल रहेंगे। बता दें कि भारत साल 2017 में एससीओ का सदस्य बना था।