पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 4 साल से चले आ रहे गतिरोध के बाद देपसांग और डेमचोक में गश्त फिर से शुरू हो गई है| यह घटनाक्रम भारतीय सेना द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त करने की सहमति के बाद हुआ है। भारतीय सेना के “फायर एंड फ्यूरी” कॉर्प्स ने पहली बार देपसांग क्षेत्र में गश्त की पुष्टि की है, जिसे एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय सेना ने सोमवार को कहा कि सैनिकों की वापसी और गश्त फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन के बीच बनी सहमति के बाद देपसांग क्षेत्र में पहली गश्त आयोजित की गई। सेना ने इसे LOC पर शांति बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी भारत-चीन सीमा विवाद में प्रगति की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सैनिकों की वापसी में ‘कुछ प्रगति’ हुई है। जयशंकर ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया, जिससे दोनों ही देशों के बीच अन्य सकारात्मक कदम उठाने की संभावना के द्वार खुलते हैं। उन्होंने कहा, “हमने पीछे हटने की दिशा में कुछ प्रगति की है, जो तब होता है जब सैनिक एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं।”
जयशंकर ने बताया कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी। हालांकि, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस के कजान में हुई मुलाकात के बाद उम्मीद जगी है कि रिश्तों में सुधार हो सकता है।
भारत और चीन के बीच हाल ही में हुई बातचीत के बाद एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इससे 2020 में उत्पन्न मुद्दों का समाधान होगा। उन्होंने इसे चार साल से जारी गतिरोध को समाप्त करने में एक बड़ी सफलता बताया है।
भारत और चीन के बीच हालिया घटनाक्रम, सीमा पर शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। देपसांग और डेमचोक में गश्त फिर से शुरू होने से यह संकेत मिलता है कि दोनों देश अपने संबंधों को सुधारने और सीमा विवाद को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
This post written by shreyasi