महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का कहर सबसे अधिक देखा गया है। आपको बता दे की कोरोना वायरस के चलते लगाए गए प्रतिबंधों में फिलहाल मंदिरों के कपाट बंद रखे गए हैं और अब राज्य में इस बात पर राजनीति शुरू हो गई है।
इस बाबत राज्य की गठबंधन वाली शिवसेना वाली सरकार का विरोध जारी है। आपको बता दे की मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य स्थित सिद्धिविनायक मंदिर के सामने प्रदर्शन किया।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए ‘मदिरा चालू मंदिर बंद’ जैसे नारे लिखे प्लेकार्ड्स का इस्तेमाल किया और उन्होंने मांग की है कि राज्य में श्रद्धालुओं के लिए सभी मंदिरों के कपाट खोले जाएं।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग को तोड़कर मंदिर में घुसने का प्रयास भी किया। विरोध प्रदर्शन की अगुआई कर रहे भाजपा नेता प्रवीण दारेकर ने कहा कि राज्य में शराब और वाइन की दुकानें खोल दी गई हैं लेकिन उनके बारे में कौन सोचेगा जो मानसिक शांति के लिए मंदिर जाते हैं।

इसी बीच भाजपा की महाराष्ट्र इकाई ने राज्य में कोविड-19 महामारी के चलते बंद मंदिरों को दोबारा खोलने की मांग को लेकर 13 अक्टूबर को आयोजित धार्मिक संगठनों के सांकेतिक उपवास को अपना समर्थन देने की शनिवार को घोषणा की।
राज्य में यह विवाद जहां पार्टियों के बीच था वही अब यह विवाद राजभवन तक जा पहुंचा है। आपको बता दे की इस मुद्दे पर राज्यपाल और सीएम उद्धव अब आमने सामने आ गए है।
दरअसल सबसे पहले तो राज्यपाल कोश्यारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। अपनी चिट्ठी में राज्यपाल ने कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ सरकार ने बार और रेस्तरां खोल दिए हैं, लेकिन मंदिर नहीं खोले गया। ऐसा न करने के लिए आपको दैवीय आदेश मिला या अचानक से सेक्युलर हो गए।
राज्यपाल के इस पत्र पर उद्धव ने भी जवाब लिखकर दे दिया। उन्होंने लिखा- जैसे तुरंत लॉकडाउन लगाना ठीक नहीं था। वैसे ही तुरंत ही इसे हटाना ठीक नहीं है। और हां, मैं हिंदुत्व को मानता हूं। मुझे आपसे हिंदुत्व के लिए सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने लिखा है कि महाराष्ट्र में धार्मिक स्थल खोलने की चर्चा के साथ कोरोना के बढ़ते मामलों का भी ध्यान रखना चाहिए। मुझे अपना हिंदुत्व साबित करने के लिए आपसे सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
जो लोग हमारे राज्य की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) से करते हैं, उनका स्वागत करना मेरे हिंदुत्व में फिट नहीं बैठता। सिर्फ मंदिर खोलने से ही क्या हिंदुत्व साबित होगा?
इसके अलावा शिवसेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, शिवसेना ने न कभी हिंदुत्व को नकारा है और न ही कभी भुलाया। हिंदुत्व शिवसेना का प्राण और आत्मा है। शिवसेना इसे कभी नहीं छोड़ सकती। जो लोग इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उन्हें आत्मनिर्भर होकर आत्ममंथन करना चाहिए।