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चिकन के बाद अब मछली पर भी मंडराया संकट के बादल,खाने से पहले हो जाएं सावधान

By: Amit ranjan 
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चिकन के बाद अब मछली पर भी मंडराया संकट के बादल,खाने से पहले हो जाएं सावधान

नई दिल्ली : देश में जारी कड़कती ठंड के बीच मुर्गा समेत अन्य कई प्रवासी पक्षियों पर बर्डफ्लू का कहर मंडराया हुआ है। जिसे लेकर पॉल्ट्रीफॉर्म ऑनर भी पेशोपेश में है, क्योंकि एकबार फिर उन्हें बर्डफ्लू के कारण बड़ी हानि होने वाली है। हालांकि अब लोग चिकन और अंडों को छोड़कर मछली की ओर स्वीच कर रहें है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जिस मछली को खा रहें हैं, वो सुरक्षित हैं या नहीं। या इससे आपके स्वास्थ को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचने वाला। अगर नहीं तो, पढ़ी ये पूरी खबर…

दरअसल आपकी थाली में रखी मछली भी सुरक्षित नहीं है, जिसका खुलासा 241 फिश फॉर्म पर की गई स्टडी में हुआ हैं। स्टडी में पता चला है कि इन फार्मों में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है, जिसका आपके स्वास्थ पर बुरा असर पड़ता हैं। आपको बता दें कि ये स्टडी 10 राज्यों के फार्मा कंपनी पर किया गया था। इस स्टडी में तमिलनाडु के कई शहरों में मछली फार्म में पानी काफी दूषित पाया गया। वहीं पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, और पश्चिम बंगाल के फार्म में काफी उच्च स्तर का सीसा मिला। बिहार, ओडिशा और तमिलनाडु के फार्म पर्यावरण के लिए काफी हानि पाए गए।

बता दें कि दक्षिण भारत के राज्यों में मछली के फार्म में सीसा और कैडमियम की सबसे ज्यादा मात्रा मिली है। ये दोनों तत्व जब शरीर के अंदर जाते है तो कोशिकाएं डैमेज हो जाती हैं। इसके अलावा जांच में पता चला कि लगभग 40 प्रतिशत फार्म बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे न सिर्फ इंसानों बल्कि मछलियों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा होता है।

आपको बता दें कि साल 2020 में केरल में 2,000 किलोग्राम से अधिक मछलियों को नष्ट कर दिया गया था क्योंकि उन्हें औपचारिक रूप से भारी मात्रा में दूषित पाया गया था। दिल्ली जैसे अन्य कई राज्यों के फार्मों में भी मछलियों को नष्ट किया गया था, क्योंकि ये सभी मछलियां इतनी प्रदूषित थी कि उन्हें खाना मुमकिन नहीं था।

द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) रूल्स, 2001 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस्स) रेगुलेशन, 2011 के अनुसार, काटने से पहले किसी भी मछली समेत किसी भी जानवर को स्वस्थ्य रहना चाहिए। जिसका ख्याल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में भी किया जाता है, लेकिन कई मछली फॉर्मों में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

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