अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान शुरू हो चुका है। आम तौर पर अमेरिका में मतदान वाली रात ही जीत और हार की तस्वीर साफ हो जाती है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस बार चुनाव परिणामों में देरी होगी। इसकी पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार अमेरिका में बहुत सारे मतदाताओं से डाक व मेल के जरिए मतदान किया है, जिसकी गणना में विलंब हो सकता है। हालांकि, अमेरिका में मतदान वाली रात मतगणना का काम खत्म नहीं होता है, लेकिन इतने मतों की गिनती हो जाती है कि जिससे जीत और हार का अनुमान आसानी से लग जाता है।
कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष पहले की तुलना में ज्यादा लोगों ने पहले ही डाक के जरिए मतदान किया हैं। डाक से डाले गए पोस्टल मतों की गिनती में ज्यादा वक्त लगता है, क्योंकि उनमें मतदाताओं की पहचान करने की प्रक्रिया पूरी करने में ज्यादा समय लगता है। फ्लोरिडा और ओहायो जैसे कुछ राज्यों में पहचान का काम पहले शुरू हो जाता है। इन राज्यों में पोस्टल मतदान के तुरंत बाद यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इससे इस बात का अनुमान लगा पाना आसान होता है कि चुनाव में कौन जीत रहा है।
कई राज्यों में परिणाम आने में देरी होने की उम्मीद है, क्योंकि पोस्टल वोटों की गिनती में अधिक समय लग सकता है। गंभीर चिकित्सा की स्थिति में या जो लोग अपने राज्य से दूर हैं, उन्हें डाक सेवा के माध्यम से वोट डालने का हक है। पोस्टल वोट एक सामान्य बैलट की तुलना में अधिक समय लेते हैं, क्योंकि प्रत्येक वोट पर हुए हस्ताक्षर का मतदान पंजीकरण से मिलान किया जाता है। इसके बाद ही मत वैध माना जाता है। 2016 में अंतिम वोट को गिनने में एक महीने से अधिका का समय लगा था।
डाक मतपत्रों की अधिक संख्या के कारण रुझाानों में भी अनियमितता बनी रहेगी। इस प्रक्रिया में अप एडं डाउन की प्रक्रिया तेजी से होती है। शुरुआती चरण में बढ़त बना लेने से किसी उम्मीदवार के लिए हार और जीत का फैसला कर पाना मुश्किल होगा, क्योंकि इसके परिणामों में बहुत तेजी से बदलाव आता है। अमेरिका में मतदान करने के दो मूल तरीके हैं। पहला चुनाव के दिन व्यक्ति मतदान कर सकता है। दूसरा वह मेल इन बैलट के जरिए भी अपना मत डाल सकता है।