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कोई भी पीड़ित व्यक्ति पण्डोखर धाम से निराश नहीं जाता- गुरुशरण महाराज

महाराज ने कहा कि भगवान के आशीर्वाद से पण्डोखर दरबार की लिखी पर्ची की पुष्टि कहीं भी करवाई जा सकती है, यहाँ कोई भी दिखावटी कार्य नहीं है। निजी जीवन से पीडित कोई भी व्यक्ति पण्डोखर धाम से निराश नहीं जाता।

By: Naredra 
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कोई भी पीड़ित व्यक्ति पण्डोखर धाम से निराश नहीं जाता- गुरुशरण महाराज

दतियाः इन्दरगढ स्थित पण्डोखर धाम के प्रमुख त्रिकाल दर्शी संत गुरुशरण महाराज ने कहा कि जिस प्रकार इलैक्ट्रॉनिक मशीन वैज्ञानिक विधि से चलती है, ठीक उसी तरह पण्डोखर सरकार का दिव्य दरवार परमात्मा के आशीर्वाद से ही संचालित होता है। हम और आप तो निमित्त मात्र हैं।

श्री महाराज ने कहा कि दुनियां में विभिन्न मौका परस्त कंपनियां शुरु होती है। यदि वो गलत होंगी तो कुछ ही समय में उनकी वास्तविकता जग जाहिर हो जाती है। लेकिन यह धरा ऋषि-मुनियों की तपोस्थली है। विगत 35, वर्षों से निर्वाध चल रहे दिव्य दरबार पर परमात्मा की साक्षात कृपा है।

महाराज ने कहा कि भगवान के आशीर्वाद से पण्डोखर दरबार की लिखी पर्ची की पुष्टि कहीं भी करवाई जा सकती है, यहाँ कोई भी दिखावटी कार्य नहीं है। निजी जीवन से पीडित कोई भी व्यक्ति पण्डोखर धाम से निराश नहीं जाता। यह सब परमात्मा के आशीर्वाद से संभव है।

दरबार में आने वाले भक्तों को  भूतकाल,  वर्तमान तथा भविष्य में घटित होने वाली समस्याओं को बिना देखे न कि सत्य बताया जाता है बल्कि उनके निदान का सटीक उपाय भी सुझाया जाता है। हनुमान जी के आशीर्वाद से इस धरा को पल्लवित करने में तकरीबन 40 वर्ष बताए हैं। तब इस वट वृक्ष ने देश-विदेश में ख्याति अर्जित की है।

भक्तों के स्नेह से पल्लवित वट वृक्ष को छति पंहुचाने वालों को कठोर जबाव दिया जायगा। इससे पूर्व श्री गुरुशरण महाराज ने संत-महात्माओं की उपस्थिति में भक्तों की मनोभावना समझते हुए न सिर्फ उनका पर्चा बनाया बल्कि निदान करने के उपाय भी बताए।

दतिया से संवाददाता विनोद कुशवाह की रिपोर्ट

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