रिपोर्ट: निहाल राठौर
नई दिल्ली: भारत का पड़ोसी देश मयांमार जो कि पहले वर्मा के नाम से जाना जाता था। यह पहले भारत का हिस्सा था, जो साल 1937 में भारत से यह पूरी तरह से अलग हो गया। तब से लेकर अब तक इस देश मे भारत के समान लोकतंत्र की सरकार थी। लेकिन, पिछले महीने ही म्यांमार मे तख्तापलट देखने को मिला। सैन्य शासन ने देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। सैन्य शासन द्वारा लोकतंत्र समर्थकों पर बर्बरता पूरी दुनिया मे चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक खबर म्यांमार के दावोई से सामने आ रही है, जहां सुरक्षा बलों ने लोकतंत्र का समर्थन कर रहें प्रदर्शनकारियों पर बगैर चेतावनी दिए ताबड़तोड़ फायरिंग कर डाली। फायरिंग मे 18 लोग के मरने और दर्जनों घायल होने की खबर सामने आ रहीं है। हालांकि, यह संख्या और भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि सभी लोग इस फायरिंग में गोली लगने से घायल हुए है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
साथ हीं, भारत ने भी इस घटना पर दुःख प्रकट किया। म्यांमार में भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों की मौत दुखद घटना है। हम मृतकों के परिवारवालों और उनके परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम सभी से आग्रह करते हैं कि संयम बरतें और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करें।