{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
हर इंसान के जीवन में ऐसा कोई ना कोई गुण होता है जिसकी वजह से उसकी समाज में इज्जत होती है। वो उसका ज्ञान भी हो सकता है और किसी उच्च पद पर नौकरी करने के कारण भी हो सकता है की उसका सम्मान हो रहा है लेकिन मनुष्य को अपनी साख बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
जैसे की कोई बड़ा अधिकारी बन जाता है तो कई लोग उसका सम्मान तो करने लग जाते है लेकिन अगर वो अच्छे कर्म नहीं करता तो उसकी साख नहीं बनती। वो किसी की मदद नहीं करता, किसी गरीब की सहायता नहीं करता तो उसके बाद कोई भी उसे पसंद नहीं करता। उसके बाद जो उसका सम्मान है वो उसके भय के कारण है।
कई लोग बड़े बड़े नेताओं और धनी लोगों का सम्मान सिर्फ इसलिए करते है ताकि अपने स्वार्थ की सिद्धि हो जाए बाकी उन लोगों की साख समाज में नहीं होती है। लेकिन जो एक ज्ञानी और गुणी पुरुष होता है वो अपनी साख बनाता है।
जैसे की रावण भी एक राजा था और राम जी भी एक राजा है। लेकिन आज हम रावण राज्य की नहीं राम राज्य कैसे हो उसकी बात करते है ! इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है।
दरअसल एक व्यक्ति उच्च पद पर है, राजा है लेकिन अनुचित कर्म करता है। व्यसन करता है, भोग करता है, स्त्रियों का सम्मान नहीं करता, जुआ खेलता है तो उसकी प्रजा भी वैसी हो जाएगी।
दूसरी और अगर कोई राजा ज्ञानी है तो वो संतों का सम्मान करेगा, कोई व्यसन नहीं करेगा, भोग नहीं करेगा, किसी को प्रताड़ित नहीं करेगा , सबको न्याय देगा और उसे देखकर उसकी प्रजा भी वैसी हो जाएगी और अपने आप राम राज्य की परिकल्पना साकार हो जाएगी।
इसलिए सिर्फ धनी होने से कुछ नहीं होता, सिर्फ बड़ा अधिकारी बन जाने से कुछ नहीं होता है। आपको अपने आप को उस स्तर तक शुद्ध रखना होता है की लोग आपसे प्रेरणा ले, लोग आपकी साख को माने।
जिस दिन लोग आपके डर के कारण नहीं, अपने स्वार्थ के कारण नहीं बल्कि मन से आपके सम्मान में खड़े होंगे उसी दिन आप समझ जाइये की समाज में आपने अपनी साख बना ली है वरना ये धन, कुर्सी, प्रतिष्ठा सब व्यर्थ है।