सोते समय खर्राटे लेना कई लोगों के लिए सामान्य बात हो सकती है, लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज आते हैं और उनके बीच सांस रुकने या अचानक हांफने जैसी स्थिति बनती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) का संकेत हो सकता है। समय पर इसका इलाज न होने पर हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी नींद संबंधी बीमारी है, जिसमें सोते समय सांस लेने का रास्ता बार-बार संकरा या बंद हो जाता है। इससे कुछ समय के लिए सांस रुक सकती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को रात में बार-बार नींद खुलने, तेज खर्राटे आने और सांस लेने के लिए हांफने जैसी परेशानी हो सकती है। कई बार व्यक्ति को खुद इसका एहसास नहीं होता, लेकिन उसके साथ सोने वाला पार्टनर इन लक्षणों को आसानी से पहचान सकता है।
स्लीप एपनिया के दौरान सांस बार-बार रुकने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इसके जवाब में शरीर तनाव प्रतिक्रिया देता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हृदय गति में उतार-चढ़ाव हो सकता है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो रक्त वाहिकाओं और हृदय पर दबाव बढ़ सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याओं और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की ओर से 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन में खर्राटे, नींद के दौरान सांस लेने में परेशानी और स्लीप एपनिया जैसे लक्षणों का स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से संबंध पाया गया। अध्ययन में खर्राटे लेने वाले लोगों में स्ट्रोक की संभावनाएं खर्राटे नहीं लेने वालों की तुलना में 91 प्रतिशत अधिक पाई गईं। हालांकि, यह अध्ययन इन दोनों के बीच संबंध दर्शाता है, यह साबित नहीं करता कि केवल खर्राटे लेने से ही स्ट्रोक होता है।
अगर किसी व्यक्ति को तेज खर्राटों के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

नहीं, हर व्यक्ति के खर्राटे स्लीप एपनिया का संकेत नहीं होते। नाक बंद होना, सोने की गलत स्थिति, शराब का सेवन, अधिक वजन और गले की बनावट भी खर्राटों की वजह हो सकती है। लेकिन यदि खर्राटे लगातार तेज आते हैं और उनके साथ सांस रुकने या दिन में अत्यधिक नींद आने जैसी समस्या है, तो स्लीप एपनिया की जांच जरूरी हो जाती है।
स्लीप एपनिया की पहचान के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार स्लीप स्टडी (Sleep Study) कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके बाद बीमारी की गंभीरता के आधार पर इलाज तय किया जाता है।
शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि अपनाएं।
सोने से पहले शराब का सेवन न करें।
करवट लेकर सोने की आदत डालें।
डॉक्टर की सलाह से CPAP जैसी उपचार पद्धति अपनाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्लीप एपनिया को लंबे समय तक अनदेखा करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। समय पर जांच, उचित इलाज और ब्लड प्रेशर जैसे जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखने से गंभीर जटिलताओं की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए अगर आपके या आपके पार्टनर के खर्राटे असामान्य रूप से तेज हैं और सांस रुकने के लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।