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मुरैना में 7 हजार की रिश्वत लेते पटवारी गिरफ्तार, लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा, जानें मामला

Madhya Pradesh News: मुरैना में लोकायुक्त ने पटवारी प्रदीप शर्मा को 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। किसान ने सीमांकन के लिए 35 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था। ऐसे में आइए यहां जानें पूरा मामल

By: Aparna Panwar 
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मुरैना में 7 हजार की रिश्वत लेते पटवारी गिरफ्तार, लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा, जानें मामला

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया है। बता दें आरोपी पटवारी की पहचान प्रदीप शर्मा के रूप में हुई है। किसान की शिकायत पर लोकायुक्त ने यह कार्रवाई की है। जिसमें किसान का आरोप है कि जमीन का सीमांकन करने के बदले पटवारी ने उससे 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

दो साल से सीमांकन के लिए परेशान था किसान

मिली जानकारी के अनुसार, मुरैना गांव निवासी किसान मुरारी लाल कुशवाहा अपनी जमीन के सीमांकन के लिए पिछले करीब दो साल से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा था। बताया जा रहा है कि इस संबंध में तत्कालीन कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ की ओर से सीमांकन के आदेश भी जारी किए गए थे। इसके बावजूद किसान की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। दरसअल, काफी समय तक परेशान रहने के बाद किसान ने लोकायुक्त से शिकायत की। जिसमें किसान का आरोप था कि हल्का पटवारी प्रदीप शर्मा सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने के बदले उससे पैसों की मांग कर रहा था।

35 हजार रुपये मांगे, पहले दे चुका था 5 हजार

शिकायत के मुताबिक, पटवारी ने सीमांकन के एवज में किसान से कुल 35 हजार रुपये मांगे थे। जिसमें किसान का कहना है कि वह पहले ही 5 हजार रुपये दे चुका था। अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उसने बाकी रकम धीरे-धीरे देने की बात कही थी। वहीं, बताया जा रहा है कि किसान ने अपनी बाजरे की फसल बेचकर पैसों का इंतजाम किया और 7 हजार रुपये लेकर पटवारी के पास पहुंचा। इसी दौरान पहले से तैयार लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे रिश्वत लेते पकड़ लिया।

रिश्वत की रकम फेंककर भागने की कोशिश

ऐसे में कार्रवाई के दौरान आरोपी पटवारी ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम फेंककर बचने की कोशिश की, लेकिन लोकायुक्त की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। टीम ने रिश्वत की रकम बरामद कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

कलेक्टर के आदेश के बाद भी क्यों भटकता रहा किसान?

जानकारी के लिए बता दें इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब किसान के सीमांकन के आदेश जारी हो चुके थे, तो उसे दो साल तक परेशान क्यों होना पड़ा? क्या बिना रिश्वत दिए सरकारी काम कराना इतना मुश्किल है? फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मामले की आगे जांच की जा रही है।

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