Madhya Pradesh News: मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में हॉस्टल अधीक्षिका के निलंबन का मामला अब छात्राओं के विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। दरसअल, बड़गांव स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर की अधीक्षिका सारिज बडोले के निलंबन के विरोध में आज सोमवार सुबह 476 छात्राएं हॉस्टल से पैदल मार्च करते हुए निकल पड़ीं हैं। बता दें छात्राओं ने करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर धोबड़िया तालाब तक पहुंचकर अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। जिसमें करीब तीन घंटे चले घटनाक्रम के बाद एसडीएम (SDM) के दो दिन में समस्या का निराकरण कराने के आश्वासन पर छात्राएं वापस लौट गईं।
मिली जानकारी के अनुसार, आज सोमवार सुबह करीब 8 बजे छात्राओं ने हॉस्टल (Hostel) से बड़गांव होते हुए डीआरपी लाइन (DRP Line) स्थित धोबड़िया तालाब तक पैदल मार्च शुरू किया। सुबह 9 बजे छात्राएं वहां पहुंचीं। इसकी जानकारी मिलते ही सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग रंजना सिंह, तहसीलदार राहुल सोलंकी और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसमें अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।
बता दें सुबह करीब 9:15 बजे समझाइश के बावजूद छात्राएं आगे बढ़ने लगीं। इसी दौरान एसडीएम भूपेंद्र रावत ने अपना वाहन रोककर छात्राओं से बातचीत शुरू की। जिसमें करीब एक घंटे तक चली चर्चा में छात्राओं ने अधीक्षिका का निलंबन रद्द करने, 29 कर्मचारियों की नियुक्ति करने और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग रखी।
छात्रा पार्वती डावर ने बताया कि हॉस्टल में कक्षा 6वीं से 12वीं तक की 476 छात्राएं रहती हैं। यहां 490 छात्राओं की क्षमता है, लेकिन व्यवस्था संभालने के लिए 29 कर्मचारियों की जरूरत के मुकाबले केवल 8 कर्मचारी ही पदस्थ हैं। जिसमें छात्राओं का कहना है कि अधीक्षिका का व्यवहार अच्छा है और उन्हें लगता है कि निलंबन की कार्रवाई उचित नहीं है। साथ ही, उन्होंने छत से पानी टपकने और दूसरी समस्याओं को दूर करने की भी मांग की है।
निलंबित अधीक्षिका सारिज बडोले ने बताया कि वह 8 और 9 तारीख को भोपाल में विभागीय बैठक में थीं। इस दौरान उन्होंने हॉस्टल का प्रभार दूसरी मैडम को सौंपा था। 10 तारीख को इंदौर से आई निरीक्षण टीम को हॉस्टल में गंदगी मिली थी। अधीक्षिका के अनुसार, वह पिछले डेढ़ साल से स्टाफ की कमी दूर करने के लिए अधिकारियों को लिखित आवेदन दे रही हैं। छत से लीकेज और चिड़ियों के घोंसलों से गिरने वाले कचरे की समस्या भी बनी हुई है।

सहायक आयुक्त रंजना सिंह ने बताया कि संभागीय उपायुक्त कार्यालय इंदौर की टीम ने निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड संधारण और साफ-सफाई में कमियां पाई थीं। इसके बाद अधीक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर संभागीय उपायुक्त ने निलंबन की कार्रवाई की।
बता दें सुबह करीब 10:30 बजे एसडीएम ने छात्राओं को दो दिन के भीतर उनकी मांगों पर निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्राएं वापस लौटने को तैयार हुईं। जिसके बाद तेज धूप को देखते हुए एसडीएम, सहायक आयुक्त और तहसीलदार ने अपने वाहनों से छात्राओं को हॉस्टल पहुंचाया। सुबह 11 बजे तक पूरा घटनाक्रम समाप्त हो गया। अब देखना होगा कि प्रशासन दो दिन के भीतर छात्राओं की मांगों और हॉस्टल में कर्मचारियों की कमी सहित अन्य समस्याओं का कितना निराकरण कर पाता है।
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