चंदौली जनपद के नियामताबाद ब्लाक अन्तर्गत पचफेड़वा गांव में कोटेदार राजकुमार पर ग्रामीणों ने फ्री राशन वितरण में घपलेबाजी और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। जॉब कार्ड की सूची में नाम होने के बावजूद कोटेदार राशन देने से इंकार कर रहा है।
बताते चलें कि केन्द्र सरकार द्वारा कोरोना वायरस से फैले महामारी में लॉकडाउन की घोषणा के बाद असहाय गरीब मजदूरों को भोजन की समस्या ना हो इसलिए गरीबों को प्रति यूनिट पांच किलो राशन फ्री में तीन माह तक देने की घोषणा की गई थी जो एक अप्रैल से लागू हो गया और कोटेदारों द्वारा ग्राम सचिव या लेखपाल की मौजूदगी में राशन वितरित किया जा रहा है,वहीं जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से फ्री राशन वितरण में कोटेदारों द्वारा मनमानी की जारही है।इस विपदा की घड़ी में जिन गरीब असहायों को राहत सामग्री की सहायता मिलनी चाहिए उनका तो मनरेगा सूची में या अंत्योदय कार्ड सूची में नाम ही नहीं है।
इससे साफ जाहिर हो रहा है कि ग्राम प्रधानों द्वारा मनरेगा मजदूरों के साथ पक्षपात किया गया जो ग्राम प्रधानों के रोज के दरबारी रहे हैं उन्हीं का जॉब कार्ड एक्टिव हैं बाकी सभी बेकार और जॉब कार्ड भी उन्हीं के एक्टिव हैं जिनके पास भोजन की कोई समस्या ही नहीं है। ग्रामीणों का आरोप था कि कोटेदार द्वारा पहले राशन हम लोगों को मिलता वो भी घर ले जाने के बाद राशन तौल में कम हो जाता है आज तो हम लोगों का नाम ही गायब है वहीं कुछ ग्रामीणों का आरोप था कोटेदार द्वारा पैसा भी ज्यादा लिया जाता है दुख तो तब हुआ जब एक लगभग 75 साल के बुजुर्ग नाम फूलगेन ने रोते हुए बताया कि कोटेदार बहुत दिनों से राशन नहीं दे रहे हैं कहने पर टाल मटोल करते हैं हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है।