खबरों के अनुसार, TRF के प्रमुख शेख सज्जाद गुल ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह घटना कश्मीर में पहली बार हुई है, जब
कश्मीरियों और गैर-कश्मीरियों दोनों को एक साथ निशाना बनाया गया। TRF के निशाने पर कश्मीरी पंडित, सिख और प्रवासी मजदूर रहते हैं। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकी हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है।
लश्कर कमांडर और TRF चीफ शेख सज्जाद गुल मोस्ट वांटेंड आतंकी है। भारतीय सेना की खुफिया एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, शेख अभी पाकिस्तान में है। शेख सज्जाद POK से अपने आतंकी संगठन को संचालित करता है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसका सुराग देने वाले और उसकी गिरफ्तारी कराने वाले को 10 लाख इनाम देने की घोषणा की है।
2019 में धारा 370 हटने के बाद उसने इस संगठन को स्थापित किया था। उसने ही TRF को लश्कर की ऑनलाइन टेररिस्ट यूनिट बताकर दुनिया के सामने पेश किया था और तब से लेकर आज तक यह आतंकी संगठन कई वारदातें अंजाम दे चुका है।
सूत्रों के अनुसार, करीब 6 महीने में TRF ऑनलाइन आतंकियों की भर्ती कर रहा है। ऑनलाइन ही आतंकी हमले करने के ऑर्डर देता है। TRF लश्कर के साथ-साथ तहरीक-ए-मिल्लत इस्लामिया और गजनवी हिंद समेत कई आतंकी संगठनों के साथ मिलकर भी काम करता है। जम्मू-कश्मीर पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 2022 में कश्मीर घाटी में कई आतंकी मारे गए थे और इनमें सबसे ज्यादा आतंकी TRF के ही थे।
इसका मकसद घाटी में फिर से 1990 वाला दौर वापस लाना है। टीआरएफ का मुख्य उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा मामले में पाकिस्तान पर बढ़ते दबाव को कम करना व कश्मीर में स्थानीय आतंकवाद को बढ़ावा देना है।
आपने बीते कुछ महीनों में कश्मीर में टारगेट किलिंग के कई मामले देखे होंगे। इनमें से अधिकतर के पीछे TRF का ही हाथ था। टीआरएफ के हैंडलर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही वे सोशल मीडिया पर कश्मीर के अंदर होने वाली हर राजनीतिक, प्रशासनिक व सामाजिक गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखते हैं। इसके जरिए यह संगठन अपने टारगेट को भी चुनता हैं।
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