{ कानपुर से इबने हसन ज़ैदी की रिपोर्ट }
CAA के विरोध में हिंसा भड़काने में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) राजनीतिक चेहरा बनकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की मदद कर रही है और इस बात का खुलासा पुलिस की छानबीन में किया गया है।
दरअसल बीती 31 जनवरी को बाबूपुरवा पुलिस द्वारा गिरफ्तार पीएफआई के पांचों सदस्यों का सीधा ताल्लुक एसडीपीआई से निकला। इंटेलीजेंस की टीम ने जेल में बंद पांचों आरोपियों से की पूछताछ में पता लगाया और जानने में आया कि एसडीपीआई के कई नेता अपनी छवि का फायदा उठाकर हिंसा भड़काने में पीएफआई का सहयोग कर रहे थे ।

शुरुआती पूछताछ में पांचों ने खुद को पीएफआई सदस्य बताया था, 3जनवरी को मेरठ पुलिस ने हिंसा भड़काने के मामले में एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष नूर हसन और उसके ड्राइवर अब्दुल मुईद हाशमी को गिरफ्तार किया था । आईबी टीम ने जेल जाकर पकड़े गए पांचों पीएफआई सदस्यों और एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष से की पूछताछ तो पता चला पांचों पीएफआई की राजनीतिक शाखा एसडीपीआई से है जुड़े ।
आईबी ने ऐसे करीब एक दर्जन एसडीपीआई नेताओं की सूची तैयार की है जिनके मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने के साथ उनकी पल-पल की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।