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छतरपुर-टीकमगढ़ वन विभाग में विधानसभा प्रश्न को लेकर विवाद, CCF पर प्रश्न ड्रॉप कराने के प्रयास के आरोप

छतरपुर-टीकमगढ़ वन विभाग में विधानसभा के तारांकित प्रश्न को ड्रॉप कराने के प्रयास के आरोपों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि CCF कार्यालय ने वन मुख्यालय को पत्र भेजकर प्रश्न निरस्त कराने का प्रयास किया। मामले की शिकायत विधानसभा प्रमुख सचिव और नेता प्रतिपक्ष से की गई है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

By: Nivedita 
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छतरपुर-टीकमगढ़ वन विभाग में विधानसभा प्रश्न को लेकर विवाद, CCF पर प्रश्न ड्रॉप कराने के प्रयास के आरोप

टीकमगढ़ और छतरपुर वन विभाग से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि विधानसभा में लगाए गए एक तारांकित प्रश्न को निरस्त (ड्रॉप) कराने के लिए मुख्य वन संरक्षक (CCF) कार्यालय की ओर से वन मुख्यालय को पत्र भेजा गया। इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने सवाल उठाए हैं।

विधायक ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर मांगी थी जानकारी

खरगापुर विधायक चंदा सिंह गौर ने जुलाई 2026 के विधानसभा सत्र के लिए तारांकित प्रश्न क्रमांक 590 लगाया था। इसमें वन वृत्त छतरपुर के अंतर्गत कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और आम नागरिकों से जुड़े मामलों की जानकारी मांगी गई थी। बताया जा रहा है कि प्रश्न में विभाग के कुछ अधिकारियों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया था।

CCF पर लगाए गए गंभीर आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विधानसभा से जानकारी मांगे जाने के बाद मुख्य वन संरक्षक कार्यालय की ओर से वन मुख्यालय को पत्र भेजकर संबंधित प्रश्न को अग्राह्य या ड्रॉप किए जाने का अनुरोध किया गया। आरोप यह भी है कि यह पत्र अधीनस्थ कार्यालयों से पूरी जानकारी प्राप्त किए बिना भेजा गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

जनप्रतिनिधि की भूमिका को लेकर उठे सवाल

मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी विधानसभा प्रश्न को इस प्रकार निरस्त कराने का प्रयास किया गया है, तो इससे जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए मुद्दों की गंभीरता प्रभावित होती है। उनका कहना है कि जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से ही प्रशासनिक जवाबदेही की अपेक्षा करती है।

विधानसभा प्रमुख सचिव और नेता प्रतिपक्ष से की गई शिकायत

समाजसेवियों और स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत विधानसभा प्रमुख सचिव और नेता प्रतिपक्ष को भेजी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

जांच और आधिकारिक निर्णय पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा और संबंधित विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं तथा शिकायतों की जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।

 

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