टीकमगढ़ जिले के पलेरा स्थित जैन मंदिर में परम पूज्य श्रमणाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 प्रशम सागर जी एवं मुनि श्री योग्य सागर जी महाराज के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी है। कार्यक्रम के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूजन, अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अभिषेक संपन्न हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य राजेन्द्र कुमार जैन ‘शिक्षक’ एवं जयकुमार जैन के परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया।
धर्मसभा में मुनि श्री योग्य सागर जी महाराज ने आत्मा और शरीर के भेद को विस्तार से समझाते हुए कहा कि दोनों का स्वरूप अलग-अलग है और इन्हें एक मानना सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि सामायिक, व्रत, संयम और तप जैसे आध्यात्मिक कार्य आत्मा के कल्याण के लिए होते हैं, जबकि सांसारिक विषयों और भोग-विलास में अधिक आसक्ति आत्मिक उन्नति में बाधक बनती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आध्यात्मिक जीवन को अपनाने और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में जैन दर्शन के सात तत्वों और अनर्थदंड व्रत के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने धर्म के मूल सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाते हुए सदाचार और संयमपूर्ण जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
धार्मिक कार्यक्रम के अंतर्गत मुनि श्री की आहार चर्या भी संपन्न हुई। इसके बाद अपराह्न में स्वाध्याय कक्षा और प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पलेरा सहित कुडयाला, देवराहा, छतरपुर, देवरा और जवारा से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।