भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंप रही है, जिससे आम जनता विशेषकर गरीब वर्ग के लिए इलाज कराना और कठिन होता जा रहा है।
जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में पहले जिला अस्पतालों के संचालन में निजी भागीदारी बढ़ाई गई और अब स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी पीपीपी मॉडल के तहत निजी संस्थाओं को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उनका कहना है कि इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मूल भावना प्रभावित होगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण से इलाज की लागत बढ़ेगी और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहले से ही निजी अस्पतालों में सामान्य बीमारियों के इलाज पर लोगों को भारी खर्च करना पड़ता है और यदि सरकारी संस्थानों में भी निजी मॉडल लागू किया गया तो आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं और महंगी हो सकती हैं।
पटवारी ने राज्य सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जनता से जुड़े मूल मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास और जनहित से जुड़े क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार करने के बजाय महत्वपूर्ण सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का लगातार विरोध कर रही है और भविष्य में भी इस मुद्दे को जनता के बीच उठाती रहेगी। पार्टी का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाएं आम नागरिकों का अधिकार हैं और इन्हें सुलभ एवं किफायती बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार की है।
जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस प्रदेशभर में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक करेगी और सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाने की मांग उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जनहित से जुड़े विषयों पर संघर्ष जारी रखेगी और जनता की आवाज को मजबूती से उठाएगी।