पन्ना। रत्नगर्भा पन्ना की धरती ने एक बार फिर मेहनतकश मजदूरों की किस्मत चमका दी है। सरकोहा गांव में निजी भूमि पर हीरा खदान लगाने वाले साझेदारों को 16.9 कैरेट का जेम क्वालिटी हीरा मिला है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है। करीब दो साल तक मेहनत करने के बाद भी जब हीरा नहीं मिला तो मजदूरों ने खदान का काम बंद कर दिया था। इसके बाद बारिश के मौसम में पुरानी हीरे की चाल देखने पहुंचे मजदूरों को मिट्टी के ढेर में यह बेशकीमती हीरा मिल गया।
जानकारी के मुताबिक, करीब दो साल पहले अखिलेश पाल ने अपने साथियों के साथ निजी जमीन पर हीरा खदान शुरू की थी। लंबे समय तक खनन करने के बावजूद जब कोई हीरा नहीं मिला तो काम बंद कर दिया गया। खदान से निकली हीरे की चाल का कुछ हिस्सा वहीं मिट्टी के ढेर के रूप में पड़ा हुआ था।
बारिश के बाद अखिलेश पाल अपने साथियों के साथ पुरानी चाल देखने पहुंचे। बारिश के पानी से मिट्टी की ऊपरी परत हट गई थी। इसी दौरान मिट्टी के बीच एक चमकदार पत्थर दिखाई दिया। पत्थर को बाहर निकालकर जांच की गई तो मजदूरों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जांच में वह जेम क्वालिटी का बेशकीमती हीरा निकला।
इस हीरे के साझेदार अखिलेश पाल, संतोष कुशवाहा, हेमचन्द्र पाल, जमुना पाल, मनोज कुशवाहा, अरुण रावत, शर्मन पाल और हीरालाल कुशवाहा बताए गए हैं। हीरे का वजन 16.9 कैरेट है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है।
हीरा मिलने के बाद मजदूरों ने इसे नियमानुसार हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है। अब इस हीरे को आगामी नीलामी में रखा जाएगा। नीलामी में मिलने वाली राशि से मजदूर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की योजना बना रहे हैं।
मजदूरों का कहना है कि हीरे की नीलामी से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल खेती की जमीन खरीदने, बच्चों की शादी करने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में किया जाएगा। कुछ साझेदारों ने अपनी शादी के सपने पूरे होने की उम्मीद भी जताई है।
पन्ना में इससे पहले भी कई बार साधारण परिवारों और मजदूरों की किस्मत हीरों ने बदली है। यही वजह है कि पन्ना की धरती को रत्नगर्भा कहा जाता है। इस बार भी 16.9 कैरेट के हीरे ने सात साझेदारों के लिए उम्मीद और खुशियों की नई चमक पैदा कर दी है।
राजेश रावत की रिपोर्ट