1. हिन्दी समाचार
  2. विदेश
  3. इप्सोस मोरी ने इस बात को लेकर सर्वे किया कि किन देशों के लोग वैक्सीन की शिद्दत से प्रतीक्षा कर रहे हैं

इप्सोस मोरी ने इस बात को लेकर सर्वे किया कि किन देशों के लोग वैक्सीन की शिद्दत से प्रतीक्षा कर रहे हैं

By: RNI Hindi Desk 
Updated:
इप्सोस मोरी ने इस बात को लेकर सर्वे किया कि किन देशों के लोग वैक्सीन की शिद्दत से प्रतीक्षा कर रहे हैं

दुनिया भर में इस समय हर किसी की निगाह कोरोना वैक्सीन पर है। हालांकि, रूस ने इस बात का दावा किया था कि उसने कोरोना की वैक्सीन बना ली है, पर दुनिया भर के चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने अभी उसे पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रिचर्ड पेटो ने भी इस बात के प्रति आगाह किया था कि वैक्सीन की दौड़ में अगर कमजोर वैक्सीन का निर्माण होता है तो वह ठीक नहीं होगा, क्योंकि उस वैक्सीन को लगाने के बाद लोग खुद को वायरस के प्रति प्रतिरोधी समझेंगे, हालांकि ऐसा होगा नहीं और बदले में इंफेक्शन फैलने का खतरा अधिक हो जाएगा। ऐसे में हमें ऐसी वैक्सीन का निर्माण करना होगा, जो प्रभावशाली हो।

इप्सोस मोरी ने इस बात को लेकर सर्वे किया कि किन देशों के लोग वैक्सीन की शिद्दत से प्रतीक्षा कर रहे हैं। सर्वे में सामने आया कि चीन में 97 प्रतिशत लोग वैक्सीन लगवाने को लेकर आतुर हैं, जबकि ब्राजील में यह प्रतिशत 88 है। वहीं, भारत में 87 फीसदी लोग वैक्सीन लगवाने को लेकर उत्सुक हैं। वहीं रूस के स्पुतनिक वैक्सीन के निर्माण के बाद भी 54 फीसदी लोग ही इसे लगवाने के इच्छुक हैं। फ्रांस में भी 59 फीसदी लोग वैक्सीन लगवाने को आतुर हैं।

ऑक्‍सफोर्ड-एस्‍ट्रोजेनेका वैक्‍सीन

ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी एस्‍ट्राजेनेका ने मिलकर कोरोना की वैक्‍सीन बनाई है। यह वैक्सीन कई देशों में फेज-3 ट्रायल से गुजर रही है। भारत में यह वैक्‍सीन सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के जरिए उपलब्‍ध होगी।

चीन की वैक्सीन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, चीन की पांच कोरोना वैक्‍सीन ऐसी हैं, जो फेज 3 ट्रायल में हैं। इनमें सिनोवेक, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स/ सिनोफॉर्म, केनसिनो बायोलॉजिकल /बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की वैक्सीन शामिल हैं।

रूस की स्पुतनिक वैक्सी

रूस का स्पुतनिक-V की नई रिपोर्ट बताती है कि यह पहले शॉट में पर्याप्त इम्यूनिटी विकसित करती है। मॉस्को के गामलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख अलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने कहा कि वैक्सीन के सुरक्षित होने के पर्याप्त उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिये एक एक्स्ट्रा डोज की ही जरूरत होगी।

कोवाक्सिन

भारत बायोटेक, आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी- पुणे के सहयोग से विकसित की जा रही कोवाक्सिन लगातार प्रगति कर रही है।

नोवावैक्स

अमेरिकी कंपनी नोवावैक्‍स की कोरोना वैक्‍सीन भी फेज-3 ट्रायल से गुजर रही है। इसके अलावा, जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्‍सीन भी आखिरी चरण के ट्रायल में है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...