योग और ध्यान के जरिए डिप्रेशन यानी अवसाद के मरीज को गंभीर स्थिति न सिर्फ बाहर निकाला जा सकता है बल्कि उसके मस्तिष्क को फिर से पुरानी ऊर्जा मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से एक दिन पहले देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के चिकित्सीय अध्ययन में यह खुलासा किया गया है।
प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार (एमडीडी) से पीड़ित 58 मरीजों पर हुए अध्ययन में दो अलग-अलग समूह बनाए गए थे, जिनमें से एक समूह को सप्ताह में पांच दिन 120 मिनट का रोजाना योग और ध्यान किया जाता था। जबकि दूसरे समूह को दवाएं दी जा रहीं थी। 12 सप्ताह बाद योग और ध्यान की बदौलत मरीजों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इनमें अवसाद के लक्षणों में लगातार कमी आ रही थी। हालांकि आयुर्वेद में योग और ध्यान के जरिए अवसार से छुटकारा मिलने की प्रमाणिकता पहले ही दी जा चुकी है।
डाॅ. रीमा दादा ने बताया कि प्रमुख अवसादतता विकार (एमडीडी) डिप्रेशन का सबसे गंभीर प्रकार है। इसमें लगातार उदासी, निराशा, नाकबिल होने की भावनाएं मन में भर जाती है। ये भावनाएं कभी भी अपने आप से दूर नहीं होती है। ऐसे मरीज दिन में ज्यादातर वक्त अवसाद से घिरे रहते है। इस स्थिति को एमडीडी के रूप में देखते है और अब इस अध्ययन से यह साबित हो सकता है कि अवसाद के उपचार में योग व ध्यान को शामिल किया जा सकता है।